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जनवादी संगठनों ने गांधी पार्क में दिया धरना, नारेबाजी की
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अल्मोड़ा। महिलाओं, दलितों और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ जनवादी संगठनों के पदाधिकारियों ने मंगलवार को गांधी पार्क में धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों, अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों पर अत्याचारों में काफी बढ़ोतरी हुई है। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार की अदूरदर्शी नीतियों ने देश की जनता को संकट में डाल दिया है।
उन्होंने आरोप लगाय कि जनता के संवैधानिक अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के हाथरस में युवती के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने हिंसा को चरम पर पहुंचा दिया है। जिसमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका बेहद चिंताजनक हालातों की तरफ इशारा करती है। यह बिना सरकार की सहायता के संभव नहीं है।
मांग उठाई कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस घटना की समयबद्ध प्रभावी जांच हो। कर्तव्य का पालन करने में कोताही बरतने वाले पुलिस समेत अन्य अधिकारियों को कड़ी सजा मिले। पीड़िता के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्नाव समेत ऐसे सभी प्रकरणों के पीड़ितों को न्याय दिलाए जाने की मांग की।
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इसके अलावा जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों का पालन करने, भूमिहीनों को जमीन और आवास मुहैया कराने, सबके लिए रोजगार और न्यूनतम मजदूरी लागू करने की सरकार से मांग की गई। उन्होंने कहा कि आरक्षण को संवैधानिक तरीके से लागू किए जाने के साथ ही दलितों पर अत्याचार, महिलाओं के साथ हिंसा होने पर कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होना चाहिए। वक्ताओं में किसान सभा के दिनेश पांडे, सीटू के आरपी जोशी, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एड्वा) की सुनीता पांडे, मुन्नी प्रसाद, स्वप्निल पांडे, यूसुफ तिवारी, शाहनवाज अंसारी, मुमताज अख्तर आदि शामिल थेे।
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उन्होंने आरोप लगाय कि जनता के संवैधानिक अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के हाथरस में युवती के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने हिंसा को चरम पर पहुंचा दिया है। जिसमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका बेहद चिंताजनक हालातों की तरफ इशारा करती है। यह बिना सरकार की सहायता के संभव नहीं है।
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मांग उठाई कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस घटना की समयबद्ध प्रभावी जांच हो। कर्तव्य का पालन करने में कोताही बरतने वाले पुलिस समेत अन्य अधिकारियों को कड़ी सजा मिले। पीड़िता के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्नाव समेत ऐसे सभी प्रकरणों के पीड़ितों को न्याय दिलाए जाने की मांग की।
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इसके अलावा जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों का पालन करने, भूमिहीनों को जमीन और आवास मुहैया कराने, सबके लिए रोजगार और न्यूनतम मजदूरी लागू करने की सरकार से मांग की गई। उन्होंने कहा कि आरक्षण को संवैधानिक तरीके से लागू किए जाने के साथ ही दलितों पर अत्याचार, महिलाओं के साथ हिंसा होने पर कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होना चाहिए। वक्ताओं में किसान सभा के दिनेश पांडे, सीटू के आरपी जोशी, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एड्वा) की सुनीता पांडे, मुन्नी प्रसाद, स्वप्निल पांडे, यूसुफ तिवारी, शाहनवाज अंसारी, मुमताज अख्तर आदि शामिल थेे।