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Almora News: जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र में फट रहे बादल
Wed, 20 Aug 2025 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 20 Aug 2025 11:27 PM IST
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अल्मोड़ा। उदय शंकर फोटोग्राफी एकेडमी ने विश्व छायांकन दिवस पर अल्मोड़ा किताब घर में फोटो टॉक आयोजित किया।
संस्था के अध्यक्ष डाॅ. महेंद्र सिंह मिराल ने गंगोत्री घाटी में पिघलते ग्लेशियर एवं जलवायु परिवर्तन के संकेत पर व्याख्यान दिया। उन्होंने गंगोत्री, रक्त वर्ण, ठेलू एवं चतुरंगी ग्लेशियरों के पीछे खिसकने की गति को स्लाइड शो के माध्यम से आकर्षक फोटो के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से गंगोत्री ग्लेशियर के पिघलने और पीछे खिसकने की दर में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर बर्फ गिरने के अनुपात में कमी का आना भी एक कारक है। जलवायु परिवर्तन होने के कारण हिमालय क्षेत्र में बादलों का फटना, अचानक किसी क्षेत्र में अतिवृष्टि का आ जाना, किसी ग्लेशियर झील का फटना जैसी अकल्पनीय घटनाएं घट रही हैं।
ये केवल उत्तराखंड के धराली में ही नहीं वरन हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, कुल्लू, मंडी और जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में घट रही है। हिमालयी क्षेत्र में नदी, नालों के किनारे बन रहे होटलों, सराय, दुकानों और भवनों पर उफान मचाती नदियां नाले इनको अपनी चपेट में ले रही हैं जो चिंता का कारण हैं। क्षेत्र की क्षमता से अधिक पर्यटक स्थानिक पारिस्थितिकी के लिए प्रतिकूल है। संचालन जयमित्र बिष्ट ने किया। वहां संस्था के संरक्षक मनमोहन चौधरी उपाध्यक्ष चेतन कपूर, भरत साह, गीता जोशी, डाॅ. इंदिरा बिष्ट, अविरल, रमीज खान, वैभव जोशी आदि मौजूद रहे।
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संस्था के अध्यक्ष डाॅ. महेंद्र सिंह मिराल ने गंगोत्री घाटी में पिघलते ग्लेशियर एवं जलवायु परिवर्तन के संकेत पर व्याख्यान दिया। उन्होंने गंगोत्री, रक्त वर्ण, ठेलू एवं चतुरंगी ग्लेशियरों के पीछे खिसकने की गति को स्लाइड शो के माध्यम से आकर्षक फोटो के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से गंगोत्री ग्लेशियर के पिघलने और पीछे खिसकने की दर में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर बर्फ गिरने के अनुपात में कमी का आना भी एक कारक है। जलवायु परिवर्तन होने के कारण हिमालय क्षेत्र में बादलों का फटना, अचानक किसी क्षेत्र में अतिवृष्टि का आ जाना, किसी ग्लेशियर झील का फटना जैसी अकल्पनीय घटनाएं घट रही हैं।
ये केवल उत्तराखंड के धराली में ही नहीं वरन हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, कुल्लू, मंडी और जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में घट रही है। हिमालयी क्षेत्र में नदी, नालों के किनारे बन रहे होटलों, सराय, दुकानों और भवनों पर उफान मचाती नदियां नाले इनको अपनी चपेट में ले रही हैं जो चिंता का कारण हैं। क्षेत्र की क्षमता से अधिक पर्यटक स्थानिक पारिस्थितिकी के लिए प्रतिकूल है। संचालन जयमित्र बिष्ट ने किया। वहां संस्था के संरक्षक मनमोहन चौधरी उपाध्यक्ष चेतन कपूर, भरत साह, गीता जोशी, डाॅ. इंदिरा बिष्ट, अविरल, रमीज खान, वैभव जोशी आदि मौजूद रहे।
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