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Almora News: अल्मोड़ा में पहाड़ के सौंदर्य को खत्म कर रहा कूड़े का अंबार
Wed, 04 Oct 2023 12:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 04 Oct 2023 12:13 AM IST
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अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर नगर पालिका के ट्रंचिंग ग्राउंड में लगा कूड़े का ढेर। संवाद
अल्मोड़ा। पहाड़ों की सेहत और सौंदर्य को बरकरार रखने के दावे कर स्वच्छ भारत अभियान के साथ स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जा रहा है, लेकिन अल्मोड़ा में नगर से लेकर गांवों तक कूड़ा निस्तारण की योजना अब तक सफल नहीं हो सकी है। अल्मोड़ा नगर पालिका के ट्रंचिंग ग्राउंड में रिसाइकिल प्लांट को स्वीकृति न मिलने से यहां 22 हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा है। इधर गांवों में कूड़ा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था न होने से कूड़ा हरे-भरे जंगलों और नदियों के किनारे फेंका जा रहा है, इससे पहाड़ों के साथ ही नदियों की खूबसूरती बिगड़ रही है।
कुमाऊं की सबसे पुरानी पहली नगर पालिका अल्मोड़ा में स्वच्छता अभियान के बीच कूड़ा निस्तारण की ठोस योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। यहां जिला मुख्यालय सहित जिले के बड़े बाजारों से निकलने वाले कूड़ा निस्तारण के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर चितई मंदिर के पास बने ट्रंचिंग ग्राउंड में करीब 15 साल से 22 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप है।
रिसाइकिलिंग प्लांट को स्वीकृति न मिलने से इसका निस्तारण नहीं हो सका है और रोजाना यहां पहुंचने वाले 17 टन से अधिक कूड़े से इसका ढेर हर दिन बढ़ रहा है। हरे-भरे जंगलों के बीच और आबादी के नजदीक बने ट्रंचिंग ग्राउंड में रिसाइकिल प्लांट न लगने से कूड़े का निस्तारण करने में पालिका के पसीने छूट रहे हैं और इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। संवाद
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कूड़ा वाहन खरीदे पर चालक और पर्यावरण मित्रों की तैनाती नहीं
अल्मोड़ा। स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए चार माह पूर्व जिले के गांवों में कूड़ा निस्तारण के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक से 11 कूड़ा वाहन खरीदे गए। मगर अब तक इन वाहनों के संचालन के लिए न चालक और ना ही पर्यावरण मित्रों की तैनाती हो सकी है। गांवों से निकलने वाले कूड़े के लिए डंपिंग जोन भी अब तक चिन्हित नहीं हो सके हैं। रानीखेत में गांवों से निकलने वाले कूड़े को खनिया गांव के गधेरे में फेंककर जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
स्याल्दे में विनोद नदी का किनारा बना डंपिंग जोन
अल्मोड़ा। स्याल्दे विकासखंड मुख्यालय में क्षेत्र के 80 से अधिक गांवों की प्यास बुझाने वाली जीवनदायिनी विनोद नदी के किनारे को ही डंपिंग जोन बनाया गया है। विकासखंड और तहसील मुख्यालय के बिल्कुल पास बहने वाली नदी के किनारे पर लगा कूड़े का ढेर सभी सफाई अभियानों पर सवाल खड़े कर रहा है।
कूड़े को पृथक कर भेजा जा रहा हल्द्वानी
चौखुटिया नगर पालिका और द्वाराहाट नगर पंचायत में कूड़े के निस्तारण के लिए द्वाराहाट के पंथीगाढ़ में डंपिंग जोन बना है, जहां कूड़े की छंटाई होती है। टॉमल, कांपेक्टर और कम्पोस्टर मशीन से कूड़े को पृथक कर इसे हल्द्वानी भेजा जा रहा है, इससे नगर पंचायत की कमाई भी हो रही है।
गधेरे में फेंका जा रहा कूड़ा
भतरौंजखान में दुकानों और घरों से निकलने वाले कूड़े को बाजार से केवल 200 मीटर दूर गधेरे में फेंका जा रहा है। यहां दो विद्यालयों का भी संचालन हो रहा है और डंपिंग जोन के ठीक नीचे पेयजल स्रोत है, इससे च्यूनी गांव के लोग अपनी प्यास बुझाते हैं।
एक साल से अटकी है रिसाइकिल प्लांट की डीपीआर
अल्मोड़ा पालिका के ट्रंचिंग ग्राउंड में रिसाइकिल प्लांट लगाने के लिए एक साल पूर्व 1.20 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई थी, इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी है। नए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए छह माह बाद अब तक भूमि नहीं मिल पाई है।
कोट
गांवों से कूड़ा उठाने के लिए वाहन खरीदे गए हैं, इनका जल्द संचालन होगा। डंपिंग जोन के लिए भी भूमि तलाशी जा रही है।
- पीतांबर प्रसाद, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी, अल्मोड़ा।
कोट
ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कूड़े के निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। रिसाइकिल प्लांट को स्वीकृति नहीं मिली। अब अन्य तकनीकों के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। - भरत त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका, अल्मोड़ा।
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कुमाऊं की सबसे पुरानी पहली नगर पालिका अल्मोड़ा में स्वच्छता अभियान के बीच कूड़ा निस्तारण की ठोस योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। यहां जिला मुख्यालय सहित जिले के बड़े बाजारों से निकलने वाले कूड़ा निस्तारण के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर चितई मंदिर के पास बने ट्रंचिंग ग्राउंड में करीब 15 साल से 22 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप है।
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रिसाइकिलिंग प्लांट को स्वीकृति न मिलने से इसका निस्तारण नहीं हो सका है और रोजाना यहां पहुंचने वाले 17 टन से अधिक कूड़े से इसका ढेर हर दिन बढ़ रहा है। हरे-भरे जंगलों के बीच और आबादी के नजदीक बने ट्रंचिंग ग्राउंड में रिसाइकिल प्लांट न लगने से कूड़े का निस्तारण करने में पालिका के पसीने छूट रहे हैं और इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। संवाद
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कूड़ा वाहन खरीदे पर चालक और पर्यावरण मित्रों की तैनाती नहीं
अल्मोड़ा। स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए चार माह पूर्व जिले के गांवों में कूड़ा निस्तारण के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक से 11 कूड़ा वाहन खरीदे गए। मगर अब तक इन वाहनों के संचालन के लिए न चालक और ना ही पर्यावरण मित्रों की तैनाती हो सकी है। गांवों से निकलने वाले कूड़े के लिए डंपिंग जोन भी अब तक चिन्हित नहीं हो सके हैं। रानीखेत में गांवों से निकलने वाले कूड़े को खनिया गांव के गधेरे में फेंककर जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
स्याल्दे में विनोद नदी का किनारा बना डंपिंग जोन
अल्मोड़ा। स्याल्दे विकासखंड मुख्यालय में क्षेत्र के 80 से अधिक गांवों की प्यास बुझाने वाली जीवनदायिनी विनोद नदी के किनारे को ही डंपिंग जोन बनाया गया है। विकासखंड और तहसील मुख्यालय के बिल्कुल पास बहने वाली नदी के किनारे पर लगा कूड़े का ढेर सभी सफाई अभियानों पर सवाल खड़े कर रहा है।
कूड़े को पृथक कर भेजा जा रहा हल्द्वानी
चौखुटिया नगर पालिका और द्वाराहाट नगर पंचायत में कूड़े के निस्तारण के लिए द्वाराहाट के पंथीगाढ़ में डंपिंग जोन बना है, जहां कूड़े की छंटाई होती है। टॉमल, कांपेक्टर और कम्पोस्टर मशीन से कूड़े को पृथक कर इसे हल्द्वानी भेजा जा रहा है, इससे नगर पंचायत की कमाई भी हो रही है।
गधेरे में फेंका जा रहा कूड़ा
भतरौंजखान में दुकानों और घरों से निकलने वाले कूड़े को बाजार से केवल 200 मीटर दूर गधेरे में फेंका जा रहा है। यहां दो विद्यालयों का भी संचालन हो रहा है और डंपिंग जोन के ठीक नीचे पेयजल स्रोत है, इससे च्यूनी गांव के लोग अपनी प्यास बुझाते हैं।
एक साल से अटकी है रिसाइकिल प्लांट की डीपीआर
अल्मोड़ा पालिका के ट्रंचिंग ग्राउंड में रिसाइकिल प्लांट लगाने के लिए एक साल पूर्व 1.20 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई थी, इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी है। नए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए छह माह बाद अब तक भूमि नहीं मिल पाई है।
कोट
गांवों से कूड़ा उठाने के लिए वाहन खरीदे गए हैं, इनका जल्द संचालन होगा। डंपिंग जोन के लिए भी भूमि तलाशी जा रही है।
- पीतांबर प्रसाद, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी, अल्मोड़ा।
कोट
ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कूड़े के निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। रिसाइकिल प्लांट को स्वीकृति नहीं मिली। अब अन्य तकनीकों के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। - भरत त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका, अल्मोड़ा।