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लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो बढ़ा फोटोग्राफी का शौक
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फोटोग्राफर महेश बिष्ट।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। लॉकडाउन में नौकरी छूटने पर सोमेश्वर के महेश बिष्ट ने अपने बचपन के शौक फोटोग्राफी से आजीविका चलाने की ठान ली है। बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक होने के बावजूद भी मेकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले महेश को लॉकडाउन में अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिला। उनकी कई फोटो अब राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका के लिए चयनित हुई है।
सोमेश्वर तहसील के मौवे गांव निवासी महेश बिष्ट ने रुड़की से मेकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने के बाद रुद्रपुर में नौकरी की। कोविड-19 के चलते उनकी नौकरी छूट गई। गांव लौटने के बाद खाली समय में उन्होंने अपने बचपन के शौक फोटोग्राफी पर हाथ आजमाने की फैसला लिया। पहाड़ों, वन्यजीवों और प्राकृतिक नजरों की फोटोग्राफी कर उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया। बाद में उन्हें एक्सप्लोर वाइल्ड इन इंडिया राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त पत्रिका के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे वन्यजीव संरक्षण अभियान में फोटोग्राफरों को उनकी प्रतिभा दिखाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने भी इसके लिए फोटो भेजनी शुरू कीं। उनकी तस्वीरों की इसमें काफी सराहना हुई। पहाड़ों की सुंदरता, गांव के प्रकृति सौंदर्य और यहां पाए जाने वाले जंगली पक्षियों की फोटो पत्रिका के लिए काफी पसंद होने लगी और राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका में उनके फोटो प्रकाशित होने लगे हैं। महेश ने बताया कि बचपन से ही उन्हें वन्यजीव फोटोग्राफी का शौक था, लेकिन अभिभावकों के कहने पर इंजीनियरिंग की पर इसके बाद भी फोटोग्राफी का शौक कभी कम नहीं हुआ। गांव लौटकर यहां की प्रकृति सौंदर्य को उन्होंने वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा। कुछ फोटो एक्सप्लोर वाइल्ड इंडिया के लिए भी गई हैं। हालांकि अभी उनकी फोटोग्राफ का अगले चरण में चयनित होना है लेकिन पहले चरण में उनकी फोटो की काफी सराहना हुई है।
राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका से 35 सौ फोटोग्राफर जुड़े हैं
अल्मोड़ा। एक्सप्लोर वाइल्ड इन इंडिया (आरएनआई) भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रिका है। फोटोग्राफर महेश बिष्ट ने बताया कि पत्रिका पूरे भारत में डब्ल्यूआईएफ इंडिया सोसाइटी ग्रुप की ओर से प्रस्तुत की गई है। ग्रुप के माध्यम से पूरे देश में करीब 3500 से अधिक फोटोग्राफर काम कर रहे हैं। 2015 से चला आ रहा डब्ल्यूआईएफ इंडिया प्रकृति और वन्यजीवों से संबंधित सर्वश्रेष्ठ पोर्टल है। इसमें प्राकृतिक वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए एक मंच है। यह देश में विलुप्त हो चुकी वन्यजीव प्रजातियों के लिए कार्य कर रहा है।
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सोमेश्वर तहसील के मौवे गांव निवासी महेश बिष्ट ने रुड़की से मेकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने के बाद रुद्रपुर में नौकरी की। कोविड-19 के चलते उनकी नौकरी छूट गई। गांव लौटने के बाद खाली समय में उन्होंने अपने बचपन के शौक फोटोग्राफी पर हाथ आजमाने की फैसला लिया। पहाड़ों, वन्यजीवों और प्राकृतिक नजरों की फोटोग्राफी कर उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया। बाद में उन्हें एक्सप्लोर वाइल्ड इन इंडिया राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त पत्रिका के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे वन्यजीव संरक्षण अभियान में फोटोग्राफरों को उनकी प्रतिभा दिखाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने भी इसके लिए फोटो भेजनी शुरू कीं। उनकी तस्वीरों की इसमें काफी सराहना हुई। पहाड़ों की सुंदरता, गांव के प्रकृति सौंदर्य और यहां पाए जाने वाले जंगली पक्षियों की फोटो पत्रिका के लिए काफी पसंद होने लगी और राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका में उनके फोटो प्रकाशित होने लगे हैं। महेश ने बताया कि बचपन से ही उन्हें वन्यजीव फोटोग्राफी का शौक था, लेकिन अभिभावकों के कहने पर इंजीनियरिंग की पर इसके बाद भी फोटोग्राफी का शौक कभी कम नहीं हुआ। गांव लौटकर यहां की प्रकृति सौंदर्य को उन्होंने वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा। कुछ फोटो एक्सप्लोर वाइल्ड इंडिया के लिए भी गई हैं। हालांकि अभी उनकी फोटोग्राफ का अगले चरण में चयनित होना है लेकिन पहले चरण में उनकी फोटो की काफी सराहना हुई है।
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राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका से 35 सौ फोटोग्राफर जुड़े हैं
अल्मोड़ा। एक्सप्लोर वाइल्ड इन इंडिया (आरएनआई) भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रिका है। फोटोग्राफर महेश बिष्ट ने बताया कि पत्रिका पूरे भारत में डब्ल्यूआईएफ इंडिया सोसाइटी ग्रुप की ओर से प्रस्तुत की गई है। ग्रुप के माध्यम से पूरे देश में करीब 3500 से अधिक फोटोग्राफर काम कर रहे हैं। 2015 से चला आ रहा डब्ल्यूआईएफ इंडिया प्रकृति और वन्यजीवों से संबंधित सर्वश्रेष्ठ पोर्टल है। इसमें प्राकृतिक वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए एक मंच है। यह देश में विलुप्त हो चुकी वन्यजीव प्रजातियों के लिए कार्य कर रहा है।
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