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Almora News: कुमाऊं-गढ़वाल को जोड़ने वाले हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे
Thu, 05 Oct 2023 11:44 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 05 Oct 2023 11:44 PM IST
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। जिले में गड्ढा मुक्त सड़कों के दावे परवान नहीं चढ़ सके हैं। जिले के प्रमुख हाईवे भी अब तक गड्ढा मुक्त नहीं हो सके हैं। ग्रामीण सड़कों हाल भी ठीक नहीं हैं। कुमाऊं को गढ़वाल से जोड़ने वाला प्रमुख हाईवे मरचूला-डोटियाल इसकी तस्दीक कर रहा है। सल्ट क्षेत्र से गुजरने वाले इस हाईवे पर कालीगांव से डोटियाल तक 12 किमी दायरे में 520 से अधिक गड्ढे यात्रियों, पर्यटकों को परेशानी देने के साथ सरकारी मशीनरी की पोल खोल रहे हैं।
वर्ष 1963 में कुमाऊं को पौढ़ी गढ़वाल से जोड़ने के साथ ही दोनों जिलों के यात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही सुगम बनाने के दावे कर मरचूला-डोटियाल हाईवे का निर्माण किया गया। पर्यटन की दृष्टि से भी यह हाईवे महत्वपूर्ण है। इससे होकर पर्यटक और यात्री नैनीताल, रामनगर, भिकियासैंण, रानीखेत सहित अन्य पर्यटक स्थलों तक पहुंचते हैं। यह हाईवे उन्हें राहत कम दर्द अधिक दे रहा है। मरचूला से डोटियाल तक 12 किमी का दायरा गड्ढों से पटा है। इस हाईवे पर हर रोज गुजरने वाले तीन हजार से अधिक पर्यटकों और यात्रियों की 520 से अधिक गड्ढे कठिन परीक्षा ले रहे हैं। गड्ढों के बीच सुरक्षित सफर करना चुनौती से कम नहीं है। बावजूद इसके सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के दावे हो रहे हैं।
बारिश का बहाना बन रहा है डामरीकरण में बाधक
मौलेखाल। बीते मानसूनकाल में सड़क की हालत बेहद खराब थी। गड्ढों में पानी भरने से पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो गई जिससे दुर्घटना का खतरा रहा। बीते तीन माह में 20 से अधिक दो पहिया वाहन गड्ढों में रपटकर चालकों को अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी। तब लोगों ने सड़क पर डामरीकरण के लिए आंदोलन किया। विभाग ने बारिश का बहाना बनाकर इससे पल्ला झाड़ लिया।
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बोले लोग
लंबे समय से सड़क बदहाल है, इससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के सभी दावे फेल हैं।
आनंद सिंह, नैकणा।
सड़क पर बने गड्ढों से गर्भवतियों और बीमारों को अस्पताल पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। लंबे समय से डामरीकरण की मांग के बाद भी हमारी नहीं सुनी जा रही है।
मनोज उपाध्याय, झिमार।
हर बार सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के दावे होते हैं, इनका असर धरातल पर नहीं दिखता। मरचूला-डोटियाल हाईवे इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
रमेश पाल, मुहारी।
हाईवे की दुर्दशा हो गई है, इस पर सफर करना खतरे से खाली नहीं है। कई बार मांग के बाद भी डामरीकरण नहीं किया जा रहा है।
संतोष कुमार, मौलेखाल।
कोट- दो किमी में डामरीकरण का बजट मिला है। अगले हिस्से में डामरीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद ही यह संभव है।
एलएम बिष्ट, जेई, लोनिवि, रानीखेत।
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वर्ष 1963 में कुमाऊं को पौढ़ी गढ़वाल से जोड़ने के साथ ही दोनों जिलों के यात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही सुगम बनाने के दावे कर मरचूला-डोटियाल हाईवे का निर्माण किया गया। पर्यटन की दृष्टि से भी यह हाईवे महत्वपूर्ण है। इससे होकर पर्यटक और यात्री नैनीताल, रामनगर, भिकियासैंण, रानीखेत सहित अन्य पर्यटक स्थलों तक पहुंचते हैं। यह हाईवे उन्हें राहत कम दर्द अधिक दे रहा है। मरचूला से डोटियाल तक 12 किमी का दायरा गड्ढों से पटा है। इस हाईवे पर हर रोज गुजरने वाले तीन हजार से अधिक पर्यटकों और यात्रियों की 520 से अधिक गड्ढे कठिन परीक्षा ले रहे हैं। गड्ढों के बीच सुरक्षित सफर करना चुनौती से कम नहीं है। बावजूद इसके सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के दावे हो रहे हैं।
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बारिश का बहाना बन रहा है डामरीकरण में बाधक
मौलेखाल। बीते मानसूनकाल में सड़क की हालत बेहद खराब थी। गड्ढों में पानी भरने से पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो गई जिससे दुर्घटना का खतरा रहा। बीते तीन माह में 20 से अधिक दो पहिया वाहन गड्ढों में रपटकर चालकों को अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी। तब लोगों ने सड़क पर डामरीकरण के लिए आंदोलन किया। विभाग ने बारिश का बहाना बनाकर इससे पल्ला झाड़ लिया।
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लंबे समय से सड़क बदहाल है, इससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के सभी दावे फेल हैं।
आनंद सिंह, नैकणा।
सड़क पर बने गड्ढों से गर्भवतियों और बीमारों को अस्पताल पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। लंबे समय से डामरीकरण की मांग के बाद भी हमारी नहीं सुनी जा रही है।
मनोज उपाध्याय, झिमार।
हर बार सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के दावे होते हैं, इनका असर धरातल पर नहीं दिखता। मरचूला-डोटियाल हाईवे इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
रमेश पाल, मुहारी।
हाईवे की दुर्दशा हो गई है, इस पर सफर करना खतरे से खाली नहीं है। कई बार मांग के बाद भी डामरीकरण नहीं किया जा रहा है।
संतोष कुमार, मौलेखाल।
कोट- दो किमी में डामरीकरण का बजट मिला है। अगले हिस्से में डामरीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद ही यह संभव है।
एलएम बिष्ट, जेई, लोनिवि, रानीखेत।