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अल्ट्रासाउंड के लिए 35 किमी की दौड़ लगाना लोगों की मजबूरी
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धौलछीना(अल्मोड़ा)। पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। सीएचसी धौलछीना में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जैसी व्यवस्था तक नहीं है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए 35 किमी से अधिक दूरी तय कर जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। अस्पताल में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का भी भारी अभाव है।
पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को उपचार और बेहतर देखभाल नहीं मिल पाने से कई बार उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, और ग्रामीण क्षेत्रों में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। भैंसियाछाना विकासखंड की करीब 32 हजार आबादी के अलावा पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के सीमांत गांव स्वास्थ्य सुविधा के लिए सीएचसी धौलछीना के भरोसे हैं। जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड एक्सरे की तक सुविधा नहीं है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए अल्मोड़ा आना पड़ता है। कई बार अल्मोड़ा अस्पतालों में पहुंचने में देर होने पर उन्हें प्राईवेट अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कोट
सुदूर 30 से 40 किमी दूर गांवों से मरीजों को जैसे तैसे धौलछीना अस्पताल लाते हैं, अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है तो यहां से 35 किमी दूर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में जाना पड़ता है। जिसमें एक या दो दिन बर्बाद हो जाते हैं। वाहनों की समस्या के बीच मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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-जगदीश पांडे, पूर्व ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष।
अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांचों के लिए लोगों जिला मुख्यालय के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। जो जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक भी हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करने की जरूरत है। सरकार को जल्द ही सीएचसी धौलछीना को संचालित कर कम से कम उचित स्वास्थ्य सुविधाएं देनी चाहिए ।
-हेमा नेगी, ग्राम प्रधान खाकरी।
इस अस्पताल में सुविधाएं न होना क्षेत्र के लिए बड़ा दुर्भाग्य है, स्टाफ और जांच मशीनों के अभाव में यहां से अल्मोड़ा जिला मुख्यालय जाना पड़ता है उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं।
-चंदन सिंह, ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष भैंसियाछाना।
धौलछीना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 2004 में बनकर तैयार हो गया था पद सृजित नहीं होने से अभी तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ही चल रही है, जैसे ही सीएचसी संचालित हो जाएगी सुविधाएं उपलब्ध होने लगेंगी।
-डॉ. बीबी जोशी, प्रभारी चिकित्साधिकारी।
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पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को उपचार और बेहतर देखभाल नहीं मिल पाने से कई बार उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, और ग्रामीण क्षेत्रों में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। भैंसियाछाना विकासखंड की करीब 32 हजार आबादी के अलावा पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के सीमांत गांव स्वास्थ्य सुविधा के लिए सीएचसी धौलछीना के भरोसे हैं। जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड एक्सरे की तक सुविधा नहीं है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए अल्मोड़ा आना पड़ता है। कई बार अल्मोड़ा अस्पतालों में पहुंचने में देर होने पर उन्हें प्राईवेट अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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कोट
सुदूर 30 से 40 किमी दूर गांवों से मरीजों को जैसे तैसे धौलछीना अस्पताल लाते हैं, अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है तो यहां से 35 किमी दूर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में जाना पड़ता है। जिसमें एक या दो दिन बर्बाद हो जाते हैं। वाहनों की समस्या के बीच मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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-जगदीश पांडे, पूर्व ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष।
अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांचों के लिए लोगों जिला मुख्यालय के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। जो जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक भी हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करने की जरूरत है। सरकार को जल्द ही सीएचसी धौलछीना को संचालित कर कम से कम उचित स्वास्थ्य सुविधाएं देनी चाहिए ।
-हेमा नेगी, ग्राम प्रधान खाकरी।
इस अस्पताल में सुविधाएं न होना क्षेत्र के लिए बड़ा दुर्भाग्य है, स्टाफ और जांच मशीनों के अभाव में यहां से अल्मोड़ा जिला मुख्यालय जाना पड़ता है उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं।
-चंदन सिंह, ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष भैंसियाछाना।
धौलछीना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 2004 में बनकर तैयार हो गया था पद सृजित नहीं होने से अभी तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ही चल रही है, जैसे ही सीएचसी संचालित हो जाएगी सुविधाएं उपलब्ध होने लगेंगी।
-डॉ. बीबी जोशी, प्रभारी चिकित्साधिकारी।