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चौबटिया उद्यान निदेशालय को शिफ्ट करने के निर्णय से भड़के जनसंगठन
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चौबटिया का उद्यान भवन। अमर उजाला
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। चौबटिया स्थित उद्यान निदेशालय को शिफ्ट करने के निर्णय का जनसंगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। 1953 में यहां निदेशालय की स्थापना की गई थी। राज्य बनने के बाद निदेशालय रसातल में चला गया, अब सरकार ने निदेशालय रिसर्च सेंटर और प्रशिक्षण केंद्र में तब्दील करने का निर्णय लिया है, जिससे लोग भड़के हुए हैं।
देवभूमि क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चंद्र जोशी और उक्रांद जिलाध्यक्ष राजेंद्र रौतेला ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.एमएम जोशी को भेजे ज्ञापन में कहा है कि 1850 में अंग्रेजों ने यहां की जलवायु को देखते हुए 100 हेक्टेयर में उद्यान स्थापित किया।
आजादी के बाद मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने पहाड़ के औद्यानिकी विकास के लिए यहां निदेशालय की स्थापना की। यहां भारी भरकम अधिकारियों, कर्मचारियों की फौज थी। पहाड को निदेशालय का लाभ मिला। कुमाऊं और गढवाल में भारी संख्या में काश्तकारों के लिए फलों के बाग बनाए गए। राज्य बनने के बाद निदेशालय की दुर्गति हो गई।
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अब सरकार ने उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण करने के बाद निदेशालय को समाप्त करने का निर्णय लिया है। जिस कारण संगठनों में आक्रोश है। बताया जा रहा है कि अब निदेशालय के स्थान पर यहां मात्र रिसर्च सेंटर और प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा।
देवभूमि क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र जोशी का कहना है कि यदि चौबटिया से निदेशालय को अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय वापस नहीं हुआ तो वृहद आंदोलन होगा।
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देवभूमि क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चंद्र जोशी और उक्रांद जिलाध्यक्ष राजेंद्र रौतेला ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.एमएम जोशी को भेजे ज्ञापन में कहा है कि 1850 में अंग्रेजों ने यहां की जलवायु को देखते हुए 100 हेक्टेयर में उद्यान स्थापित किया।
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आजादी के बाद मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने पहाड़ के औद्यानिकी विकास के लिए यहां निदेशालय की स्थापना की। यहां भारी भरकम अधिकारियों, कर्मचारियों की फौज थी। पहाड को निदेशालय का लाभ मिला। कुमाऊं और गढवाल में भारी संख्या में काश्तकारों के लिए फलों के बाग बनाए गए। राज्य बनने के बाद निदेशालय की दुर्गति हो गई।
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अब सरकार ने उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण करने के बाद निदेशालय को समाप्त करने का निर्णय लिया है। जिस कारण संगठनों में आक्रोश है। बताया जा रहा है कि अब निदेशालय के स्थान पर यहां मात्र रिसर्च सेंटर और प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा।
देवभूमि क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र जोशी का कहना है कि यदि चौबटिया से निदेशालय को अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय वापस नहीं हुआ तो वृहद आंदोलन होगा।