रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड विधि परिसीमन आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी एडवोकेट दिनेश तिवारी ने कुविवि के कुलपति के उस बयान की भर्त्सना की है, जिसमें उन्होंने राज्य के पुनर्गठन की वकालत की है। कहा कि पर्वतीय राज्य की अवधारणा को पूरी तरह से बर्बाद करने की साजिश चल रही है इससे राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने तत्काल कुलपति को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।
तिवारी ने कहा कि कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने पृथक पर्वतीय राज्य की मांग की थी। जिसमें केवल कुमाऊं और गढ़वाल की कमीश्नरियां ही शामिल की गई थीं। कहा कि राज्य गठन के समय हरिद्वार जिले को राज्य में मिलाकर पर्वतीय राज्य की अवधारणा कमजोर कर दी गई, अब राज्य के पुनर्गठन की मांग की जा रही है, जो कि ठीक नहीं है। कहा कि पहाड़ से विधानसभा में प्रतिनिधित्व कम करने की साजिश चल रही है। अब कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें तत्काल पद से हटाने की उन्होंने मांग की।