मां-बाप की करतूतों से बुरी तरह पिस गया मासूम
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कहते हैं कि मां-बाप के कर्मों का फल बच्चों को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक वाकया आज देखने को मिला। पहले मां दो बच्चों को बाप के पास छोड़कर कहीं चली गई। फिर बाप बड़े बच्चे को साथ लेकर कहीं चल दिया और एक साल के हर्षित को अपने एक पड़ोसी को सौंप गया।
पड़ोसी दंपति ने जब बच्चे को पाल पोषकर ढाई साल का कर दिया तो असली मां बच्चे पर दावा करने पहुंच गई है। जबकि बच्चा डेढ़ साल से परवरिश करने वाली मां से ही ममता करने लगा है और असली मां की गोद में जाने को तैयार नहीं है। फिलहाल बाल कल्याण संस्था ने इस बच्चे को राजकीय शिशु सदन भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले का निवासी जीवन चंद्र भट्ट कुछ साल पहले तक यहां दुगालखोला में अपनी पत्नी नीमा भट्ट और दो बच्चों के साथ किराए पर रहता था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी अपनी चार साल और एक साल के दो बच्चों को उसके पास छोड़कर भाग गई थी।
कुछ दिनों तक जीवन चंद्र भट्ट ने पुलिस से पत्नी को खोजने की मांग की लेकिन उसका पता नहीं चला। पत्नी के वापस नहीं लौटने पर जीवन चंद्र भट्ट अपने चार साल के बेटे को अपने साथ लेकर कहीं चला गया। बताया गया है कि उसने किसी अन्य महिला के साथ शादी कर ली। जबकि वह एक साल के बच्चे को पड़ोसी नरेंद्र भोज को सौंप गया।
नरेंद्र भोज और उसकी पत्नी ने बच्चे का अपने घर पर दोबारा नामकरण किया और अपने खुद के बच्चे की तरह पालने लगे। उनकी एक बेटी पहले से ही थी। इस बीच बीते दिनों बच्चे की मां (जीवन चंद्र भट्ट की पत्नी)नीमा भट्ट घूम फिरकर अल्मोड़ा आ गई और एनटीडी अल्मोड़ा में किराए का कमरा लेकर रहने लगी। जब उसे पता लगा कि उसके छोटे बेटे को उसका पति दुगालखोला में सौंप गया है तो उसने पुलिस में शिकायत करके बेटे को दिलाने की मांग की।
पुलिस अधीक्षक केएस नगन्याल के निर्देश पर पुलिस की स्माइल टीम के इंचार्ज गोविंद बल्लभ भट्ट और कांस्टेबल धीरेंद्र परिहार तथा विनोद कुटियाल इस बच्चे और उसका पालन पोषण करने वाले नरेंद्र भोज और उनकी पत्नी को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रो. इला साह के पास लेकर आए।
नीमा भट्ट का कहना था कि वह बच्चे की असली मां है इसलिए बच्चा उसे ही मिलना चाहिए। जबकि नरेंद्र भोज और उसकी पत्नी का कहना था कि बच्चे के पिता ने स्टांप पेपर में लिखकर बच्चा उन्हें सौंपा था और वह डेढ़ साल से उसका पालन पोषण कर रहे हैं। इसलिए बच्चा उन्हें ही दिया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रो. इला साह ने फिलहाल बच्चे को राजकीय शिशु सदन भेज दिया। उन्होंने बताया कि बच्चे की असली मां से सभी साक्ष्य आदि पेश करने को कहा गया है उसके बाद ही बच्चे को सौंपने की कार्रवाई की जाएगी।
अब ढाई साल का हो चुका बच्चा नरेंद्र भोज और उसकी पत्नी के साथ इतना घुल मिल गया है कि उन्हें ही अपना असली माता-पिता समझता है। असली मां नीमा ने बच्चे को गोद में लेने का प्रयास किया तो वह उनके पास नहीं गया और जोर-जोर से रोने लगा। डेढ़ साल से पाल रही सुनीता भोज भी बच्चा छिनने से बहुत रोती रही।