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परीक्षकों की लापरवाही का एक और नमूना
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 30 Apr 2016 10:35 PM IST
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उत्तराखंड बोर्ड के परीक्षकों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में एक और लापरवाही का मामला सामने आया है। विवेकानंद इंटरमीडिएट कालेज की बारहवीं की छात्रा श्रीया पांडे की कापियों के पुनर्मूल्यांकन में छह अंकों की बढ़ोतरी हुई है। उनके कुल अंक 455 से बढ़कर 461 हो गए हैं।
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राज्य में मेरिट सूची में उनकी रैंकिंग तेरह के स्थान पर अब सात हो गई है।तल्ला जोशीखोला निवासी हरीश चंद्र पांडे और बीना पांडे की पुत्री श्रीया पांडे भी मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं थीं। उन्होंने बोर्ड कार्यालय से कापियों की छाया प्रति मंगवाई और पुनर्मूल्यांकन करवाया।
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पुनर्मूल्यांकन में गणित में चार अंक और रसायन विज्ञान में दो अंक की बढ़ोतरी हुई है। अब उनके गणित में 90 के स्थान पर 94 और रसायन विज्ञान में 87 के स्थान पर 89 अंक हो गए हैं। जबकि हिंदी, अंग्रेजी में 95-95, भौतिकी में 88 अंक हैं।
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उन्हें पूर्व में 500 में 455 अंक प्राप्त हुए थे। छह अंक की बढ़ोतरी होने पर उन्हें 461 अंक प्राप्त हुए हैं। मेरिट सूची में तेरहवें स्थान से अब वह सातवें स्थान पर पहुंच गई हैं। मेधावी छात्रा श्रीया पांडे वर्तमान में पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक (मैकेनिकल) कर रही हैं। परीक्षकों की लापरवाही के चलते उत्तराखंड शिक्षा निदेशालाय की ओर से दिए जाने वाले पं. दीनदयाल उपाध्याय उत्कृष्ट पुरस्कार-2015 से भी श्रीया वंचित हो गई हैं।