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झाड़ियों और काई में सिमटा पंतगांव का पंत स्मारक
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:27 PM IST
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पंत स्मारक की बदहाली
- फोटो : अमर उजाला
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महापुरुषों के नाम पर बने स्मारक और पार्क किस कदर बदहाली का दंश झेल रहे हैं, इसका अंदाजा पंतगांव के प्राचीन पंत स्मारक को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। अत्यधिक रमणीक स्थल पर स्थित इस स्मारक की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्मारक घास और काई से पटा हुआ है। यहां से हिमालय की लंबी पर्वत श्रंखला के दर्शन होते हैं।
ग्रामीणों की मांग के बावजूद यह स्थल पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित नहीं किया गया है। पंत जयंती के अवसर पर शासन प्रशासन की ओर से यहां कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते।
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पंतगांव नैसर्गिक छटा और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यधिक रमणीक स्थल है। इसी के मद्देनजर 1962 में तत्कालीन यूपी सरकार ने यहां स्व. गोविंद बल्लभ पंत का स्मारक बनाया, लेकिन इसके संरक्षण की जिम्मेदारी किसी को भी नहीं सौंपी। हालात यह हैं कि स्मारक पूरी तरह से झाड़ियों से ढक चुका है।
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पत्थरों में काई जम चुकी है। स्मारक की साफ सफाई की सुध लेने वाला कोई नहीं रह गया है। शासन-प्रशासन की ओर से पंत स्मारक पर कोई कार्यक्रम तक आयोजित नहीं किए जाते। वन पंचायत सरपंच सलाहकार समिति के सदस्य भूपाल भंडारी ने बताया कि दो साल पूर्व तत्कालीन डीएम को भी यहां कार्यक्रम कराने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन उन्होंने भी सुध नहीं ली। हालांकि, ग्रामीणों की तरफ से कभी कभार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन शासन प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पाता।
पंतगांव के प्रधान चंद्रशेखर पंत ने बताया कि स्मारक को जोड़ने के लिए तितालीखेत-पंत स्मारक-विनायक दो किमी मोटर मार्ग की हालत खराब है। पंत स्मारक तक वाहन पहुंचते हैं, लेकिन सड़क बदहाली के चलते बंद पड़ी हुई है। वन विभाग भी इसकी सुध नहीं ले रहा। जबकि विनायक तक मिलान भी नहीं हो पाया है। सड़क का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
तितालीखेत से पंत स्मारक तक मोटर मार्ग के सुधारीकरण के लिए जिला योजना के माध्यम से प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन धनराशि नहीं मिल पाई है। अगले वित्तीय वर्ष में फिर प्रयास होंगे। गैरगांव विनायक तक मिलान के लिए एक किमी का हिस्सा शेष है, इसके लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
- दीवानी राम, रेंजर वन विभाग, रानीखेत।