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रानीखेत में तेंदुए की धमक से दहशत: विशेषज्ञ बोले- भोजन की तलाश में जंगल से आबादी की ओर आ रहे हिंसक जीव

Wed, 30 Jul 2025 12:20 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, रानीखेत
अमर उजाला नेटवर्क, रानीखेत Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 30 Jul 2025 12:20 PM IST
सार

रानीखेत के द्वारसों क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार दिख रहे तेंदुए के डर से लोग परेशान हैं। लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त करने की मांग की है। विशेषज्ञों की मानना है कि तो तेंदुए अब आसानी से मिलने वाले शिकार का आदी होता जा रहा है।

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Panic due to leopard threat in Ranikhet
शिकार की तलाश में द्वारसों क्षेत्र में दिन दहाड़े मोबाइल कैमरे में कैद तेंदुआ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रानीखेत क्षेत्र में इन दिनों तेंदुए के लगातार दिखने से लोग परेशान हैं। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में शाकाहारी जीवों की घटती संख्या और इंसानी दखल अंदाजी के चलते तेंदुए भोजन की तलाश में आबादी की ओर आ रहे हैं। वे यहां पालतू मवेशियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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रानीखेत के द्वारसों क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार दिख रहे तेंदुए के डर से लोग परेशान हैं। लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त करने की मांग की है। विशेषज्ञों की मानना है कि तो तेंदुए अब आसानी से मिलने वाले शिकार का आदी होता जा रहा है। जिससे उसके व्यवहार में बदलाव आ रहा है और भविष्य में यह इंसान के लिए सीधा खतरा बन सकता है। तेंदुए की यह बदलती आदत अब सीधे तौर पर इंसानी जीवन के लिए चुनौती बन चुकी है। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगने लगा है, लोग शाम होते ही दरवाजे बंद कर लेते हैं। कई गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने, कैमरे लगाने और वन क्षेत्रों में शाकाहारी वन्यजीवों को फिर से बसाने की मांग की है, ताकि तेंदुओं को उनके मूल निवास में ही रोका जा सके।

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तेंदुआ अब जंगलों की बजाय आबादी में आकर शिकार करना ज्यादा आसान समझने लगे हैं। यहां उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती, और पालतू जानवर खुले में बंधे मिल जाते हैं। यह आदत भविष्य में इंसानों पर हमलों का कारण भी बन सकती है।

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-गिरीश चंद्र, वन्यजीव विशेषज्ञ

जंगलों में शाकाहारी प्रजातियों की संख्या घट रही है। साथ ही इंसानी अतिक्रमण, अवैध कटान और पर्यावरण असंतुलन ने गुलदार जैसे शिकारी जानवरों को भोजन के लिए गांवों की ओर आने को मजबूर कर दिया है।

-लोचन बिष्ट, वन्यजीव विशेषज्ञ

स्कूल प्रांगण में घुस गया था तेंदुआ
जागेश्वर धाम के निकट भगरतोला गांव में बीते दिनों दिनदहाड़े एक तेंदुआ प्राथमिक स्कूल में घुस गया। इससे बच्चों सहित अध्यापकों में हड़कंप मच गया। कमरों में बच्चों को कैद करना पड़ा। उसके बाद पहुंचे अभिभावकों ने बच्चों को रेस्क्यू किया।

समाधान की दरकार
- ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग गश्त बढ़ाए
- तेंदुओं के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाए जाएं
- जंगलों में चीतल, सांभर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ाई जाए
- आबादी से सटे क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और सीसीटीवी लगाए जाएं

मानसूनकाल में घरों के आसपास घास और झाड़ियां उग आती हैं। तेंदुए और अन्य जानवरों के छुपने को सुरक्षित स्थान मिल जाता है। लोगों से अपील है कि अपने घरों के आसपास साफ-सफाई व्यवस्था बनाए रखे। तेंदुए के दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
-दीपक सिंह, डीएफओ अल्मोड़ा

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