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श्रावणी उपाकर्म की तिथि को लेकर पंडित एकमत नहीं

Mon, 17 Jul 2017 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा। Updated Mon, 17 Jul 2017 10:40 PM IST
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Pandit unanimously over the date of Shravani Upakram
अल्मोड़ा के वरिष्ठ ज्योतिर्विद पंडित डा. मदन मोहन पाठक - फोटो : अमर उजाला

इस बार सात अगस्त रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण श्रावणी उपाकर्म उस दिन नहीं मनाया जाएगा। इसकी जगह श्रावणी उपाकर्म 27 अथवा 28 जुलाई को मनेगा, इसे लेकर कुमाऊं के ज्योतिर्विदों में विवाद की स्थिति खड़ी हो गई है। कुमाऊं में अधिक प्रचलित पंडित राम दत्त जोशी के पंचांग में श्रावण उपाकर्म 28 जुलाई को मनाने की बात कही गई है जबकि तारा प्रसाद दिव्य पंचांग सहित कई अन्य ज्योतिर्विदों के मुताबिक पंचमी 27 जुलाई को ही है और 28 जुलाई को पंचमी उदयव्यापिनी है और सिर्फ दो घड़ी 44 पला (करीब एक घंटा 10 मिनट) तक ही है। इसलिए श्रावणी उपाकर्म 27 जुलाई को मनाया जाएगा।

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अल्मोड़ा के वरिष्ठ ज्योतिर्विद पंडित डा. मदन मोहन पाठक ने कुमाऊं के कई ज्योतिर्विदों से व्यापक मंत्रणा के बाद बताया कि इस बार सात अगस्त को चंद्र ग्रहण होने के कारण सिर्फ रक्षा बंधन ही मनाया जाएगा। श्रावणी उपाकर्म पंचमी के दिन होगा। ऐसी स्थिति कई सालों में आ जाती है। इससे पहले 1990 में भी यह स्थिति आई थी। उन्होंने बताया कि कुमाऊं के ज्योतिर्विद पंडित पंकज सत्यवली, बुजुर्ग ज्योतिर्विद पंडित अंबा दत्त जोशी, पंडित कैलाश चंद्र जोशी, पंडित ललित जोशी सहित अनेक ज्योतिर्विद एकमत हैं कि श्रावणी उपाकर्म 27 जुलाई को ही होगा।
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उन्होंने कहा कि एक पंचांग में श्रावणी उपाकर्म 28 जुलाई को होने की बात कही गई है। कुछ अन्य पंडित श्रावणी उपाकर्म इसी आधार पर मनाने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि श्रावणी उपाकर्म पंचमी के दिन ही होता है और 27 जुलाई को लगभग पूरे दिन पंचमी का शुभकाल है। जबकि 28 जुलाई को पंचमी की मात्र उदयव्यापिनी तिथि है।
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जो सूर्योदय काल में सिर्फ दो घड़ी 44 पला (करीब एक घंटा 10 मिनट) तक ही है। जबकि श्रावणी उपाकर्म में यज्ञ, पितृ तर्पण सहित पूर्ण पंचांग कर्म के बाद यज्ञोपवीत और महासूत्र प्रतिष्ठित होते हैं। जिसमें कम से कम चार से छह घंटे का वक्त लगता है। डा.मदन मोहन पाठक ने लोगों से श्रावणी उपाकर्म को लेकर भ्रमित नहीं होने को कहा है। उन्होंने कहा कि श्रावणी उपाकर्म 27 जुलाई को ही संपन्न होगा। जबकि राखी सात अगस्त को ही मनाई जाएगी।

 

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