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नए विषय खोल दिए लेकिन शिक्षक नहीं भेजे
पूरन भंडारी/अमर उजाला ब्यूरो/जैंती (अल्मोड़ा)।
Updated Mon, 31 Aug 2015 12:07 AM IST
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लोगों की मांग पर प्रदेश सरकार गांव-गांव में डिग्री कालेज खोल दे रही है, लेकिन इन कालेजों की हालत भी दूरस्थ क्षेत्रों के प्राथमिक और जूनियर स्कूलों जैसी ही चल रही है।
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राम सिंह धौनी राजकीय महाविद्यालय जैंती में सिर्फ चार शिक्षक तैनात हैं। सरकार ने महाविद्यालय में इस साल से बीएससी, एमए में प्रवेश दे दिए हैं, लेकिन इन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं भेजा है, जिससे छात्रों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
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वर्ष 1996 में अविभाजित उप्र में रहने के दौरान तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा की घोषणा के बाद जैंती में महाविद्यालय की स्थापना की गई। महाविद्यालय करीब 15 साल सर्वोदय इंटर कालेज जयंती के भवन में किराये पर संचालित किया गया।
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बीते दो वर्षों से कालेज धामद्यौ स्थित नए भवन में संचालित किया जा रहा है, लेकिन अभी भी महाविद्यालय में समस्याओं का अंबार है।
वर्तमान में महाविद्यालय में करीब 350 विद्यार्थी पढ़ते हैं। बीते साल क्षेत्रीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के प्रयासों से महाविद्यालय में बीएससी, एमए (हिंदी, संस्कृत, राजनीतिशास्त्र) विषयों की स्वीकृति मिल गई।
इस साल इन विषयों और कक्षाओं में प्रवेश भी दे दिए गए हैं, लेकिन बीएससी की कक्षाएं पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं भेजा गया है। स्थिति यह है कि महाविद्यालय में आज भी सिर्फ चार प्रवक्ता हैं।
बीएससी में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, एमए में हिंदी, संस्कृत, राजनीतिशास्त्र, बीए में अंग्रेजी, समाजशास्त्र, हिंदी, संस्कृत, राजनीति शास्त्र, इतिहास विषयों के प्रवक्ताओं के पद खाली चल रहे हैं।
महाविद्यालय की हालत देखते हुए कई छात्र अल्मोड़ा, हल्द्वानी में प्रवेश लेने को मजबूर हैं। बीएससी में प्रयोगात्मक पढ़ाई के लिए प्रयोगशाला होना जरूरी है, लेकिन डिग्री कालेज जैंती में बीएससी खुलने के बावजूद अभी तक एक भी प्रयोगशाला का निर्माण नहीं हो पाया है।
इस कारण बीएससी के छात्र प्रैक्टिकल करने से वंचित रहते हैं। राम सिंह धौनी राजकीय महाविद्यालय जैंती के पास अपना खेल मैदान नहीं है।
इस कारण कालेज में महाविद्यालयी स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी नहीं हो पा रहा है। छात्रसंघ की मांग के बावजूद न तो खेल मैदान बनाया जा रहा है और न ही प्रवक्ताओं के खाली पदों पर नियुक्ति की गई है।