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Almora News: अल्मोड़ा में एक लाख लोग मधुमेह से पीड़ित
Sun, 29 Jun 2025 11:48 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 29 Jun 2025 11:48 PM IST
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अल्मोड़ा। पहाड़ की स्वस्थ आबोहवा में भी अब लोगों को कई तरह के रोग होने लगे हैं। सवा छह लाख की आबादी में भी करीब एक लाख लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। बदलते खान-पान और भागदौड़ वाले जीवन में इस तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो भविष्य के लिए बड़े खतरे के संकेत हैं।
अक्सर पहाड़ की ताजा हवा और शुद्ध पानी समय स्वास्थ्य के लिए मुफीद माना गया है। जहां महानगरों में दूषित हवा और प्रदूषण समेत भागदौड़ भरी जिंदगी से लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं वहीं अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी पहले की तुलना में बीमारियां बढ़ रही हैं। मधुमेह भी इनमें आम बीमारी हो गई है, जो युवाओं और यहां तक बच्चों को भी जकड़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पताल से मुफ्त बिकने वाली इसकी दवाओं की अगर बात करें तो हर माह 20 हजार से अधिक टैबलेट फ्री में मरीजों को दी जा रही है।
चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार अनियंत्रित जीवन शैली और जंक फूड के बढ़ते चलन से पिछले चार सालों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। जिला अस्पताल में पिछले तीन माह में करीब पांच हजार से अधिक मरीजों की जांच हुई। इसमें 35 से 60 साल की उम्र के सौ से अधिक लोगों में रोग की पुष्टि हुई है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना तीन सौ से अधिक मेटफॉरमिन टैबलेट की खपत है। कुछ मामलों में चिकित्सक की सलाह पर मरीजों को इंसुलिन भी दी जाती है।
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इस कारण होता है मधुमेह
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. हरीश आर्या ने बताया कि शुगर (मधुमेह) मुख्य रूप से दो कारणों से होता है। शरीर में इंसुलिन की कमी या कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग न कर पाना। इंसुलिन एक हार्मोन है जो शरीर में ग्लूकोज (शर्करा) को ऊर्जा के लिए कोशिकाओं में ले जाने में मदद करता है। बताया कि ओपीडी में 25 से अधिक उम्र के युवक और युवतियां भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं।
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अक्सर पहाड़ की ताजा हवा और शुद्ध पानी समय स्वास्थ्य के लिए मुफीद माना गया है। जहां महानगरों में दूषित हवा और प्रदूषण समेत भागदौड़ भरी जिंदगी से लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं वहीं अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी पहले की तुलना में बीमारियां बढ़ रही हैं। मधुमेह भी इनमें आम बीमारी हो गई है, जो युवाओं और यहां तक बच्चों को भी जकड़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पताल से मुफ्त बिकने वाली इसकी दवाओं की अगर बात करें तो हर माह 20 हजार से अधिक टैबलेट फ्री में मरीजों को दी जा रही है।
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चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार अनियंत्रित जीवन शैली और जंक फूड के बढ़ते चलन से पिछले चार सालों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। जिला अस्पताल में पिछले तीन माह में करीब पांच हजार से अधिक मरीजों की जांच हुई। इसमें 35 से 60 साल की उम्र के सौ से अधिक लोगों में रोग की पुष्टि हुई है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना तीन सौ से अधिक मेटफॉरमिन टैबलेट की खपत है। कुछ मामलों में चिकित्सक की सलाह पर मरीजों को इंसुलिन भी दी जाती है।
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इस कारण होता है मधुमेह
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. हरीश आर्या ने बताया कि शुगर (मधुमेह) मुख्य रूप से दो कारणों से होता है। शरीर में इंसुलिन की कमी या कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग न कर पाना। इंसुलिन एक हार्मोन है जो शरीर में ग्लूकोज (शर्करा) को ऊर्जा के लिए कोशिकाओं में ले जाने में मदद करता है। बताया कि ओपीडी में 25 से अधिक उम्र के युवक और युवतियां भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं।