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सकुनी के ऐतिहासिक सुखेश्वर महादेव मंदिर भी खतरे की जद में
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सुखेश्वर मंदिर में इस तरह से आ रही दरारें। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। बग्वालीपोखर के सकुनी में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक सुखेश्वर महादेव मंदिर खतरे की जद में है। मंदिर के चौपाल और गर्भगृह के पिछले भाग में दरारें आ गई हैं। चौपाल की छत में एक सुरंग सी बन गई है। इससे मंदिर परिसर में खतरा हो गया है। यह ऐतिहासिक शिव मंदिर केदारनाथ मंदिर की शैली में निर्मित है।
स्वयंभू शिव श्री शुकदेव की पावन साधना स्थली शुकेश्वर महादेव मंदिर बग्वालीपोखर से करीब एक किमी की दूरी पर ग्राम पंचायत सकुनी में स्थित है। महाभारत कालीन यह मंदिर सुखदेव ऋषि की तपस्या स्थली रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर में प्राचीन चतुर्भुजी गणेश की प्रतिमा, शिवशक्ति, पाषाण मुखी नंदी, शिव परिवार, भैरव और अन्य देवी-देवताओं की पत्थरों की दुर्लभ कलाकृतियों वाली मूर्तियां हैं। कुमाऊं के कत्यूरी, चंद राजाओं ने सकुनी सहित कई गांव दान में देकर और सकुनी के अधिकारियों को यहां पूजा, पाठ करने का दायित्व सौंपा था। अचानक मंदिर की छत में छेद, दरारें पड़ने की जानकारी सर्वप्रथम गांव के बच्चों को मिली।
इसके बाद शास्त्री चंद्रशेखर अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण शर्मा आदि ने इसे देखा। इस ऐतिहासिक मंदिर की मान्यताओं के चलते दूरदराज से भी दर्शनार्थी आते रहते हैं। शासन के संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग ने इसी साल 18 मार्च को मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराने के लिए डीएम को पत्र भेजा है।
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स्वयंभू शिव श्री शुकदेव की पावन साधना स्थली शुकेश्वर महादेव मंदिर बग्वालीपोखर से करीब एक किमी की दूरी पर ग्राम पंचायत सकुनी में स्थित है। महाभारत कालीन यह मंदिर सुखदेव ऋषि की तपस्या स्थली रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर में प्राचीन चतुर्भुजी गणेश की प्रतिमा, शिवशक्ति, पाषाण मुखी नंदी, शिव परिवार, भैरव और अन्य देवी-देवताओं की पत्थरों की दुर्लभ कलाकृतियों वाली मूर्तियां हैं। कुमाऊं के कत्यूरी, चंद राजाओं ने सकुनी सहित कई गांव दान में देकर और सकुनी के अधिकारियों को यहां पूजा, पाठ करने का दायित्व सौंपा था। अचानक मंदिर की छत में छेद, दरारें पड़ने की जानकारी सर्वप्रथम गांव के बच्चों को मिली।
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इसके बाद शास्त्री चंद्रशेखर अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण शर्मा आदि ने इसे देखा। इस ऐतिहासिक मंदिर की मान्यताओं के चलते दूरदराज से भी दर्शनार्थी आते रहते हैं। शासन के संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग ने इसी साल 18 मार्च को मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराने के लिए डीएम को पत्र भेजा है।
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