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जिला मुख्यालय का पशु अस्पताल सदर जर्जर हालत में, छत से टपकता है पानी
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अल्मोड़ा स्थित पशु अस्पताल सदर का जर्जर भवन
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। राज्य गठन के 21 सालों बाद भी जिले में कई पशु अस्पतालों के भवन नहीं बन सके। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल (सदर) जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। भवन की छत जीर्णशीर्ण है। कई स्थानों पर छत में छेद हो चुके हैं। इससे बारिश होने पर पानी अंदर टपकता है।
जिले में 37 पशु अस्पताल और एक सचल अस्पताल है। लंबे समय से पशु अस्पताल (सदर), बानठौक, जौरासी, धामस, मौलेखाल (सल्ट), मासी के अस्पताल किराये के भवनों में संचालित हैं। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल (सदर) जर्जर किराये के भवन में चल रहा है।
इस भवन की दीवारों में कई स्थानों पर दरारें आ गईं हैं। छत भी जीर्णशीर्ण हो गई है। छत में कई स्थानों पर छेद हो गए हैं। इससे बारिश में पानी छत से टपक कर कमरों के भीतर घुस जाता है। इससे कर्मचारियों को दिक्कतें होतीं हैं। पशु अस्पताल परिसर में बीमार पशुओं के उपचार के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है।
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इस अस्पताल में पशुओं की सिर्फ ओपीडी चलती है। आवास सुविधा भी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशु अस्पतालों के भवनों की स्थिति खराब है। किराये के कई भवनों की हालत जर्जर है। किराये पर संचालित इन पशु चिकित्सालयों में सीमित जगह होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभाग किराये के भवनों में संचालित हो रहे अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए भूमि तलाश रहा है लेकिन उसे जमीन नहीं मिली। इस कारण फिलहाल अभी किराये के भवनों में चल रहे इन अस्पतालों के भवन बनने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
दवाइयों के खराब होने का खतरा
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल (सदर) में ही केंद्रीय औषधि भंडार है। केंद्रीय औषधि भंडार से जिले में स्थापित सभी पशु अस्पतालों को दवाइयों की सप्लाई होती है। जीर्णशीर्ण छत से तेज बारिश में पानी टपक कर अंदर आ जाता है। इससे औषधि भंडार में रखी गई दवाइयों के खराब होने और दस्तावेजों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
कुछ अस्पताल अभी किराये के भवन में संचालित किए जा रहे हैं। अस्पताल भवनों के लिए भूमि की तलाश जारी है। भूमि का चयन होने पर संबंधित प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। ताकि अस्पतालों के भवन जल्द से जल्द भवन बन सकें।
- डॉ. रवींद्र चंद्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा।
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जिले में 37 पशु अस्पताल और एक सचल अस्पताल है। लंबे समय से पशु अस्पताल (सदर), बानठौक, जौरासी, धामस, मौलेखाल (सल्ट), मासी के अस्पताल किराये के भवनों में संचालित हैं। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल (सदर) जर्जर किराये के भवन में चल रहा है।
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इस भवन की दीवारों में कई स्थानों पर दरारें आ गईं हैं। छत भी जीर्णशीर्ण हो गई है। छत में कई स्थानों पर छेद हो गए हैं। इससे बारिश में पानी छत से टपक कर कमरों के भीतर घुस जाता है। इससे कर्मचारियों को दिक्कतें होतीं हैं। पशु अस्पताल परिसर में बीमार पशुओं के उपचार के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है।
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इस अस्पताल में पशुओं की सिर्फ ओपीडी चलती है। आवास सुविधा भी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशु अस्पतालों के भवनों की स्थिति खराब है। किराये के कई भवनों की हालत जर्जर है। किराये पर संचालित इन पशु चिकित्सालयों में सीमित जगह होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभाग किराये के भवनों में संचालित हो रहे अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए भूमि तलाश रहा है लेकिन उसे जमीन नहीं मिली। इस कारण फिलहाल अभी किराये के भवनों में चल रहे इन अस्पतालों के भवन बनने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
दवाइयों के खराब होने का खतरा
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल (सदर) में ही केंद्रीय औषधि भंडार है। केंद्रीय औषधि भंडार से जिले में स्थापित सभी पशु अस्पतालों को दवाइयों की सप्लाई होती है। जीर्णशीर्ण छत से तेज बारिश में पानी टपक कर अंदर आ जाता है। इससे औषधि भंडार में रखी गई दवाइयों के खराब होने और दस्तावेजों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
कुछ अस्पताल अभी किराये के भवन में संचालित किए जा रहे हैं। अस्पताल भवनों के लिए भूमि की तलाश जारी है। भूमि का चयन होने पर संबंधित प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। ताकि अस्पतालों के भवन जल्द से जल्द भवन बन सकें।
- डॉ. रवींद्र चंद्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा।