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कागजी अखरोट बनेगा किसानों की आय का जरिया, चार हजार पौधे लगाने की बनी योजना

Tue, 29 Dec 2020 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Tue, 29 Dec 2020 11:38 PM IST
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Nut Farming in Almora will make the source of farmers income
अखरोट - फोटो : Pixabay

कम मांग वाले मोटे छिलके के अखरोट की जगह जिले में उन्नत प्रजाति के कागजी अखरोट को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्यान विभाग ने इस सीजन में कागजी अखरोट के करीब चार हजार पौधे लगाने की योजना बनाई है। इस प्रजाति के पेड़ पांच साल में फल देने लगते हैं। इनमें फल भी दूसरी प्रजातियों की अपेक्षा अधिक आते हैं। उद्यान विभाग की योजना सफल रही तो कागजी अखरोट किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित हो सकता है।अखरोट उत्पादन के लिए साढ़े चार हजार फिट से अधिक ऊंचाई के क्षेत्र उपयुक्त माना जाता है। जिले की जलवायु अखरोट उत्पादन के अनुकूल है।

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जिले में अभी 2820 हेक्टेयर क्षेत्र अखरोट के पेड़ों से आच्छादित है। जिले में 8500 मीट्रिक टन अखरोट का उत्पादन होता है। वर्तमान में 17 हजार से अधिक किसान अखरोट उत्पादन से जुड़े हैं। अखरोट का बाजार मूल्य चार सौ रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। कागजी अखरोट के 700 रुपये प्रति किलो तक मिल जाते हैं। खेती और उद्यानीकरण के साथ अखरोट उत्पादन से जुड़कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत पिछले साल विभाग ने मानिला के 13 गांवों में 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट के पौधे लगाए थे।
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उद्यान विभाग ने ताकुला विकासखंड के राजकीय प्रजनन उद्यान भैसोड़ी में कागजी अखरोट की नर्सरी तैयार की है। पिछले अक्तूबर में यहां विभाग ने कागजी अखरोट का एक क्विंटल बीज बोया था। यहां पर अखरोट के चार हजार पौधों की नर्सरी तैयार कर ली गई है। मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि हार्टिकल्चर टेक्नोलाजी मिशन और अन्य योजना के अंतर्गत किसानों को अखरोट के पौधे दिए जाएंगे। अखरोट के पौधों के रोपण के लिए जनवरी से 15 फरवरी तक का समय उपयुक्त रहता है।
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परंपरागत अखरोट से कहीं बेहतर

अभी तक पर्वतीय क्षेत्र में आम तौर पर बहुत सख्त छिलके वाला अखरोट होता है। कुछ अखरोट तो दांत से तोड़े जा सकते हैं लेकिन ऐसे अखरोट भी बहुतायत में होते हैं, जिनको पत्थर या दूसरी भारी वस्तुओं की मदद से तोड़ा जाता है। इनका बीज भी छोटे टुकड़ों में बड़ी मुश्किल से निकलता है। इसे कांठी अखरोट कहते हैं। इस वजह से इसकी बाजार मूल्य भी नगण्य रहता है। कागजी अखरोट का छिलका काफी पतला होता है जो कि हाथों से दबाकर भी टूट जाता है। इस अखरोट की बाजार में भारी मांग होती है। कुमाऊं में इस प्रजाति के पेड़ हाल के वर्षों में लगाए जाने लगे हैं।

विदेशों में भी अखरोट की काफी मांग

अखरोट की विदेशों में भी काफी मांग है। स्पेन, मिश्र, जर्मनी, नीदरलैंड, यूके, फ्रांस, ताइवान जैसे देशों में भारतीय अखरोट की काफी खपत है।

काफी पौष्टिक होता है अखरोट
1- पर्वतीय क्षेत्र में उत्पादित होने वाला अखरोट काफी पौष्टिक और सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।
2- अखरोट में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशिमय, आयरन, फास्फोरस, कॉपर, सेललेनियम, ओमेगा-तीन पाया जाता है।
3- ओमेगा तीन फैटी एसिड याद्दाश्त बढ़ाता है और कॉपर, मैग्निशियम और मैगनीज हड्डियों के लिए अच्छे होते हैं।
4- खून में कोलेस्ट्रोल के लेवल को भी नियंत्रित करता है और यह औषधीय गुणों से भरपूर है।
5- अखरोट की गिरी को भिगोकर खाने से ब्लड शूगर नियंत्रित होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।

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