अब स्वाइप मशीन के जरिये भी मिलने लगा दो हजार कैश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि आने वाला जमाना कैशलैस बैंकिंग का होगा। आरबीआई ने कैश लैस बैंकिंग को बढ़ावा देने की कवायद तेज कर दी है। इसे देखते हुए अब एसबीआई व्यवसायियों से स्वाइप मशीनें लगाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके लिए कई सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं। स्वाइप मशीनों के जरिये मशीन धारक आम लोगों को एटीएम कार्ड स्वैप कराकर दो हजार रुपये तक का भुगतान भी कर सकेंगे। इसके लिए बैंक स्वायप मशीन धारकों को हर रोज कैश उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा एंड्रायड मोबाइल में इंटरनेट के जरिये भी किसी व्यक्ति को खाते से भुगतान करने की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है।
पांच सौ और हजार रुपए के नोट बंद होने के बाद अब बैंकों ने कैशलेस बैंकिंग को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। एसबीआई ने व्यवसायियों से कहा है कि भुगतान प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक स्वाइप मशीनें लगाएं। एसबीआई के रीजनल मैनेजर महेश बर्थवाल ने बताया कि स्वाइप मशीन के जरिये जहां ग्राहकों से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं वहीं लोगों को एटीएम कार्ड स्वाइप करके हर रोज दो हजार रुपए तक कैश भी उपलब्ध करा सकते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति स्वाइप मशीन के जरिये हजार-दो हजार रुपए प्राप्त करेगा, संबंधित मशीन धारक के खाते में उतनी ही राशि डिपोजिट हो जाएगी। एसबीआई स्वाइप मशीन रखने वाले व्यवसायियों आदि को हर रोज कैश उपलब्ध कराएगा और इसका हिसाब प्रति दिन शाम को कर लिया जाएगा। उन्हें प्रति ट्रांजेक्शन पांच रुपए भी मिलेंगे। अल्मोड़ा में एक-दो व्यवसायियों ने शुक्रवार को कुछ लोगों को स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान भी किया।
आरएम श्री बर्थवाल ने यह भी बताया कि स्वाइप मशीन लगाने के लिए व्यवसायियों से मशीन की कोई कीमत नहीं ली जा रही है। इसके लिए ट्रांजेक्शन के हिसाब से कुछ चार्जेज लिए जाते हैं। बताया गया है कि बीते कुछ दिनों में कई व्यवसायियों ने स्वाइप मशीनें बुक करा दी हैं। इसके अलावा एसबीआई ने लोगों को इंटरनेट से पैसा प्राप्त करने की भी सुविधा प्रदान कर दी है। इसके लिए एंड्रायड मोबाइल अथवा लैपटॉप में एसबीआई बडी (बीयूडीडीवाई) लोड करने के बाद प्रक्रिया पूरी करके पैसा वॉलेट में आ जाएगा। इस पैसे को संबंधित व्यक्ति भुगतान के लिए किसी भी खाते में ट्रांसफर कर सकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाला जमाना कैश लैस बैंकिंग का होगा और लोगों को नोटों से भुगतान करने की जरूरत कम ही पड़ेगी।