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पांडवखोली में अब साल भर पहुंचते हैं विदेशी श्रद्धालु
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:32 PM IST
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पांडवखोली का द्रोपदी विहार।
- फोटो : अमर उजाला
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योग और ध्यान केंद्र के रूप में विकसित हो रही स्वर्गपुरी पांडवखोली अब विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा स्थल बन चुका है। अमेरिका, इंग्लैंड, युक्रेन सहित कई देशों के पर्यटक साल भर यहां आकर योग और ध्यान करते हैं। समुद्रतल से 8800 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल धार्मिक और अध्यात्मिक पर्यटन के रूप में विकसित हो सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से भी अब पथ सौंदर्यीकरण सहित तमाम विकास कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है।
पर्यटन नगरी से 60 किमी की दूरी पर स्थित स्वर्गपुरी पांडव खोली के लिए द्वाराहाट से कुकूछीना जाना पड़ता है। कुकूछीना से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडव खोली जैसे दिव्य और एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। यहां पांडव खोली से हिमालय और सनराइज तथा सन सैट के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसी के चलते यहां देशी विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं। साल भर यहां अमेरिका, इंग्लैंड, मलेशिया, स्पेन, कनाडा, जापान और यूक्रेन से लोग आकर योग और ध्यान करते हैं। पथ भ्रमण संघ यहां हर साल संस्थापक ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि महाराज की पुण्य तिथि पर भंडारा और रचनात्मक कार्यक्रम करता है।
इस बार 10 दिसंबर को यह कार्यक्रम आयोजित होगा। पथ भ्रमण संघ अध्यक्ष हरीश शाह का कहना है कि लोगों के सहयोग से अब यहां ध्यान मठ टावर, ध्यान मठ कुटिया सहित कुछ और निर्माण किए गए हैं, पर्यटन मानचित्र से इस स्थल को जगह नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां तीन किमी संपर्क मार्ग के सौंदर्यीकरण और आश्रम की चहारदीवारी के लिए 40 लाख की घोषणा की थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है। पर्यटन महकमा यह कार्य करेगा।
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रानीखेत। पांडवखोली नाम के पीछे कहावत है कि महाभारत काल में जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ था, तब पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ इसी स्थल पर रहे थे। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है उसे भीम की गुदड़ी कहा जाता है। द्रौपदी विहार, तपोवन आदि देखने के लिए भी खासी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
पर्यटन नगरी से 60 किमी की दूरी पर स्थित स्वर्गपुरी पांडव खोली के लिए द्वाराहाट से कुकूछीना जाना पड़ता है। कुकूछीना से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडव खोली जैसे दिव्य और एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। यहां पांडव खोली से हिमालय और सनराइज तथा सन सैट के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसी के चलते यहां देशी विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं। साल भर यहां अमेरिका, इंग्लैंड, मलेशिया, स्पेन, कनाडा, जापान और यूक्रेन से लोग आकर योग और ध्यान करते हैं। पथ भ्रमण संघ यहां हर साल संस्थापक ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि महाराज की पुण्य तिथि पर भंडारा और रचनात्मक कार्यक्रम करता है।
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इस बार 10 दिसंबर को यह कार्यक्रम आयोजित होगा। पथ भ्रमण संघ अध्यक्ष हरीश शाह का कहना है कि लोगों के सहयोग से अब यहां ध्यान मठ टावर, ध्यान मठ कुटिया सहित कुछ और निर्माण किए गए हैं, पर्यटन मानचित्र से इस स्थल को जगह नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां तीन किमी संपर्क मार्ग के सौंदर्यीकरण और आश्रम की चहारदीवारी के लिए 40 लाख की घोषणा की थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है। पर्यटन महकमा यह कार्य करेगा।
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रानीखेत। पांडवखोली नाम के पीछे कहावत है कि महाभारत काल में जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ था, तब पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ इसी स्थल पर रहे थे। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है उसे भीम की गुदड़ी कहा जाता है। द्रौपदी विहार, तपोवन आदि देखने के लिए भी खासी संख्या में लोग पहुंचते हैं।