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नदियों को अपने रास्ते बहने देना भी मंजूर नहीं
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
Updated Wed, 03 May 2017 09:59 PM IST
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नदियों के किनारे अतिक्रमण रोकने के लिए कोई स्पष्ट कानून न होने से कोसी, गगास, रामगंगा आदि नदियों के आसपास भी तेजी से निर्माण हो रहे हैं। सिंचाई, राजस्व विभाग, प्रशासन, सिंचाई विभाग सहित किसी भी सरकारी एजेंसी को यह मालूम तक नहीं है कि नदी से कितनी दूरी तक निर्माण पर रोक है।
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पिछले कुछ साल से यह भी देखने में आ रहा है कि नदियां जिन स्थानों पर सड़कों के पास से निकल रही हैं, वहां निर्माण अधिक हो रहे हैं। बागेश्वर में तो लोग सरयू नदी के भीतरी हिस्से में पिलर डालकर निर्माण करने लगे हैं। यहां खुद पर्यटन विभाग ने ही नदी में शौचालय का निर्माण कर दिया था। अल्मोड़ा-भवाली मार्ग में कोसी नदी के किनारे भी तमाम स्थानों पर भवन और दुकानें आदि बना दी गई हैं।
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यही स्थिति गगास नदी के किनारे बिंता, अल्मियां, भतौरा सहित कुछ स्थानों पर भी दिखाई पड़ रही है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता डीसी सिंह ने भी यह स्वीकार किया है कि फिलहाल नदियों के किनारे कितने मीटर तक निर्माण में प्रतिबंध है, इस बारे में नियम बहुत स्पष्ट नहीं हैं।
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पूर्व में सरकार और हाइकोर्ट ने भी लगाई थी रोक
-2013 की केदारनाथ आपदा के बाद प्रदेश में नदी किनारे निर्माण का मुद्दा भी उठा। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बाकायदा आदेश जारी कर नदियों के तट से सौ मीटर की दूरी तक निर्माण कार्य प्रतिबंधित कर दिए थे। इसके बाद यह भी कहा गया कि नदियों के बाढ़ क्षेत्र में हुए निर्माण चिह्नित कर हटाए जाएंगे और शुरूआत सरकारी भवनों से की जाएगी। हाल ही में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी नदी क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित करने की ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की थी। इससे पहले वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश ने गंगा के 200 मीटर के दायरे में धार्मिक संस्थाओं को निर्माण की स्वीकृति दी थी। 2013 की आपदा के बाद नैनीताल हाइकोर्ट ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण को प्रतिबंधित कर दिया था।