कोई खास नहीं, सभी के वाहन आम
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उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद जिले में सभी सरकारी और प्राइवेट वाहनों में किसी भी तरह के पद नाम और विभाग आदि का बोर्ड लगाने और वाहन में पुलिस, आर्मी, प्रेस आदि किसी भी तरह का कोई भी शब्द लिखने पर प्रतिबंध लागू हो गया है। सरकारी और गैर सरकारी वाहनों में अधिकारी और विभागों के बोर्ड लगाने अथवा कुछ लिखा होने पर वाहनों पर 177 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद डीएम और एसएसपी ने भी अपने वाहनों से पद नाम वाले बोर्ड हटा दिए हैं। जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को भी अपने वाहनों से बोर्ड हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। कई अधिकारियों ने अपनी कारों से पद नाम वाले बोर्ड हटा दिए हैं।
बता दें कि बीते दिनों उच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका में दिए गए फैसले में सभी सरकारी और प्राइवेट वाहनों में किसी भी तरह के बोर्ड लगाने पर प्रतिबंध कर दिया है। यही नहीं वाहनों के शीशों और अन्य किसी भी हिस्से में पुलिस, न्यायिक अधिकारी, आर्मी, प्रेस जैसा कोई भी शब्द लिखने पर भी प्रतिबंध लग गया है। न्याय विभाग के अधिकारियों को भी इससे छूट नहीं है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद परिवहन सचिव डी सेंथिल पांडियन ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। परिवहन सचिव का पत्र पहुंचने के बाद जिलाधिकारी ईवा आशीष श्रीवास्तव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी करके सभी सरकारी वाहनों से अफसरों के पद नाम वाले बोर्ड हटाने और उनमें कुछ नहीं लिखने के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी, एसएसपी सहित जिले के कई अफसरों ने वाहनों से पद नाम वाले बोर्ड हटा दिए हैं। अब अफसरों और आम लोगों के वाहन एक जैसे नजर आने लगे हैं।
इधर एआरटीओ आलोक कुमार जोशी ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शासन से लिखित निर्देश पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी वाहन में कोई बोर्ड लगा पाया गया अथवा आर्मी, प्रेस, पुलिस आदि किसी भी अन्य तरह के शब्द लिखा पाए जाने पर संबंधित वाहनों के चालान किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपने वाहनों से खुद ही बोर्ड आदि हटा लेने को कहा है। उन्होंने कहा कि चेकिंग के दौरान ऐसा पाए जाने पर संबंधित वाहनों के खिलाफ मोटर यान अधिनियम की धारा 177 के तहत कार्रवाई की जाएगी।