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रोडवेज के कई बसों के चक्के रहे जाम
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No Roadways Bus Service To Shama
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बागेश्वर। शामा-दिल्ली रोडवेज बस सेवा का करीब 10 साल से संचालन बंद है। लंबी दूरी की सवारियों को बस पकड़ने के लिए टैक्सी में 60 किमी का सफर तय कर बागेश्वर आना पड़ता है। कई बार क्षेत्रीय लोग बस के दोबारा संचालन की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद परिवहन निगम की ओर से सुध नहीं ली जा रही है।
जिले में रोडवेज की परिवहन सुविधा नाममात्र के लिए है। जिले में रोडवेज डिपो न होने के कारण बाहरी डिपो की बसों का संचालन किया जाता है। लंबी दूरी की केवल छह रोडवेज की बसें जिला मुख्यालय से होकर गुजरतीं हैं। ग्रामीण मार्गों और छोटे रूटों के लिए रोडवेज की कोई बस नहीं है। पूर्व में शामा से दिल्ली तक सीधी बस सेवा थी।
इसका लाभ कपकोट के दूरस्थ क्षेत्र शामा, भनार, लीती, रमाड़ी, भनार, झोपड़ा, फरसाली सहित क्षेत्रों के 30 से अधिक गांवों के लोगों को मिलता था। पहले एक बस हादसा होने के बाद सेवा बाधित हो गई थी, जिसके बाद उसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका। क्षेत्र के कई युवा महानगरों में रोजगार करते हैं, जिन्हें घर लौटने पर बागेश्वर से टैक्सी की मदद से गांव तक आना पड़ता है।
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महानगरों को जाने वालों को भी जिला मुख्यालय आकर ही बस पकड़नी पड़ती है। वहीं क्षेत्र के लोगों को भी जिला मुख्यालय आने के लिए टैक्सी का महंगा किराया चुकाना पड़ रहा है।
इधर, रोडवेज के स्टेशन प्रभारी केबी उपाध्याय ने कहा कि बस हादसे के बाद कुछ वर्षों तक बस का संचालन ठप था। क्षेत्रवासियों की मांग पर कुछ दिनों के लिए संचालन शुरू हुआ, लेकिन यात्री न मिलने के कारण निगम को नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद निगम ने बस का संचालन बंद कर दिया है।
रोडवेज के कई बसों के चक्के रहे जाम
अल्मोड़ा। रोडवेज की कई बसों का संचालन बृहस्पतिवार को नहीं हुआ। डिपो में चालकों की कमी बनी है। इस वजह से अल्मोड़ा डिपो से संचालित होने वाली टनकपुर, बेतालघाट-दिल्ली, धरमघर, बागेश्वर समेत दो अन्य बसों के पहिये थमे रहे। सहालग में बसों का संचालन न होने से डिपो को आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में रोडवेज की परिवहन सुविधा नाममात्र के लिए है। जिले में रोडवेज डिपो न होने के कारण बाहरी डिपो की बसों का संचालन किया जाता है। लंबी दूरी की केवल छह रोडवेज की बसें जिला मुख्यालय से होकर गुजरतीं हैं। ग्रामीण मार्गों और छोटे रूटों के लिए रोडवेज की कोई बस नहीं है। पूर्व में शामा से दिल्ली तक सीधी बस सेवा थी।
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इसका लाभ कपकोट के दूरस्थ क्षेत्र शामा, भनार, लीती, रमाड़ी, भनार, झोपड़ा, फरसाली सहित क्षेत्रों के 30 से अधिक गांवों के लोगों को मिलता था। पहले एक बस हादसा होने के बाद सेवा बाधित हो गई थी, जिसके बाद उसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका। क्षेत्र के कई युवा महानगरों में रोजगार करते हैं, जिन्हें घर लौटने पर बागेश्वर से टैक्सी की मदद से गांव तक आना पड़ता है।
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महानगरों को जाने वालों को भी जिला मुख्यालय आकर ही बस पकड़नी पड़ती है। वहीं क्षेत्र के लोगों को भी जिला मुख्यालय आने के लिए टैक्सी का महंगा किराया चुकाना पड़ रहा है।
इधर, रोडवेज के स्टेशन प्रभारी केबी उपाध्याय ने कहा कि बस हादसे के बाद कुछ वर्षों तक बस का संचालन ठप था। क्षेत्रवासियों की मांग पर कुछ दिनों के लिए संचालन शुरू हुआ, लेकिन यात्री न मिलने के कारण निगम को नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद निगम ने बस का संचालन बंद कर दिया है।
रोडवेज के कई बसों के चक्के रहे जाम
अल्मोड़ा। रोडवेज की कई बसों का संचालन बृहस्पतिवार को नहीं हुआ। डिपो में चालकों की कमी बनी है। इस वजह से अल्मोड़ा डिपो से संचालित होने वाली टनकपुर, बेतालघाट-दिल्ली, धरमघर, बागेश्वर समेत दो अन्य बसों के पहिये थमे रहे। सहालग में बसों का संचालन न होने से डिपो को आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।