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स्वीकृति के सात साल बाद भी लमगड़ा डिग्री कॉलेज चल रहा है उधार के भवन में
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ऊधार के इसी भवन में संचालित होता है राजकीय महाविद्यालय लमगड़ा।
- फोटो : ALMORA
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लमगड़ा (अल्मोड़ा)। राजकीय महाविद्यालय लमगड़ा पिछले सात सालों से पशुपालन केंद्र के भवन में संचालित हो रहा है। महाविद्यालय में सिर्फ बीए की कक्षाएं ही संचालित होती है। बीकॉम, बीएससी, एमए, एमकॉम, एमएससी की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को 35 किमी दूर अल्मोड़ा या 100 किमी दूर हल्द्वानी जाना पड़ता है। इतनी दूर विद्यार्थी प्रतिदिन आना जाना नहीं कर सकते हैं। ऐसे में छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल हो जाती है। खासकर कई गरीब परिवारों के छात्रों की आगे की पढ़ाई छूट जाती है।
क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2014 में लमगड़ा में राजकीय महाविद्यालय खोला गया। कॉलेज में कुल 220 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्वीकृति के समय से ही कॉलेज पशुपालन केंद्र के भवन में संचालित हो रहा है। उधार के भवन चल रहे कॉलेज में भी पांच-छह कमरे ही हैं। पढ़ाने के लिए कक्षा-कक्षों की कमी है जबकि कोरोना काल में दूरी बनाए रखने के लिए अधिक कमरों की जरूरत है। कॉलेज में बीए में हिंदी साहित्य, हिंदी भाषा, शिक्षाशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिविज्ञान, अंग्रेजी साहित्य, अंग्रेजी भाषा विषय ही खुले हैं। अन्य विषय न होने से छात्र-छात्राएं इन्हीं विषयों को पढ़ने को मजबूर हैं। कई छात्र अल्मोड़ा अथवा हल्द्वानी में कमरा लेकर पढ़ाई करते हैं। गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले कई छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल हो जाती है। शहर में रहकर किराये में कमरा लेकर पढ़ाई का खर्चा उठाने में गरीब बच्चे असमर्थ होते है। इससे कई बार उनकी पढ़ाई छूट जाती है। इधर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा रानी ने बताया कि गौलीमहर में कॉलेज के भवन के लिए भूमि चिह्नित है। बीएससी समेत अन्य कक्षाएं खोलने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
डिग्री कॉलेज लमगड़ा में कला संकाय के सभी विषय खोेेले जाएं
बीए करने के बाद आगे एमए करना चाहता हूं। कॉलेज में एमए न होने के काफी दिक्कतें हो रही हैं। एमए करने के लिए शहरों में जाना पड़ता है। शहरों में पढ़ाई में काफी खर्चा आता है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए खर्चा उठाना मुश्किल होता है। इससे कई बार गरीब छात्रों की पढ़ाई छूट जाती है। बीए में भी गिने चुने ही विषय खुले हैं। कॉलेज में अन्य विषय भी खुलने चाहिए ताकि विद्यार्थी अपने पसंद के विषयों की पढ़ाई कर सके।
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- युकेश सिंह बिष्ट, बीए द्वितीय वर्ष
कॉलेज में बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी कक्षाएं शुरू की जाएं
सरकार ने लमगड़ा में महाविद्यालय तो खोल दिया लेकिन यहां बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी की कक्षाओं के संचालन को स्वीकृति नहीं दी है। इस कारण क्षेत्र में बच्चे वाणिज्य और विज्ञान वर्ग की पढ़ाई करने से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर छात्रों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है। इस कारण वह शहरों में भी पढ़ाई के लिए नहीं जा सकते हैं। कॉलेज में बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी कक्षाएं शुरू की जानी चाहिए।
- सागर पांडे, बीए तृतीय वर्ष
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क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2014 में लमगड़ा में राजकीय महाविद्यालय खोला गया। कॉलेज में कुल 220 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्वीकृति के समय से ही कॉलेज पशुपालन केंद्र के भवन में संचालित हो रहा है। उधार के भवन चल रहे कॉलेज में भी पांच-छह कमरे ही हैं। पढ़ाने के लिए कक्षा-कक्षों की कमी है जबकि कोरोना काल में दूरी बनाए रखने के लिए अधिक कमरों की जरूरत है। कॉलेज में बीए में हिंदी साहित्य, हिंदी भाषा, शिक्षाशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिविज्ञान, अंग्रेजी साहित्य, अंग्रेजी भाषा विषय ही खुले हैं। अन्य विषय न होने से छात्र-छात्राएं इन्हीं विषयों को पढ़ने को मजबूर हैं। कई छात्र अल्मोड़ा अथवा हल्द्वानी में कमरा लेकर पढ़ाई करते हैं। गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले कई छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल हो जाती है। शहर में रहकर किराये में कमरा लेकर पढ़ाई का खर्चा उठाने में गरीब बच्चे असमर्थ होते है। इससे कई बार उनकी पढ़ाई छूट जाती है। इधर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा रानी ने बताया कि गौलीमहर में कॉलेज के भवन के लिए भूमि चिह्नित है। बीएससी समेत अन्य कक्षाएं खोलने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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डिग्री कॉलेज लमगड़ा में कला संकाय के सभी विषय खोेेले जाएं
बीए करने के बाद आगे एमए करना चाहता हूं। कॉलेज में एमए न होने के काफी दिक्कतें हो रही हैं। एमए करने के लिए शहरों में जाना पड़ता है। शहरों में पढ़ाई में काफी खर्चा आता है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए खर्चा उठाना मुश्किल होता है। इससे कई बार गरीब छात्रों की पढ़ाई छूट जाती है। बीए में भी गिने चुने ही विषय खुले हैं। कॉलेज में अन्य विषय भी खुलने चाहिए ताकि विद्यार्थी अपने पसंद के विषयों की पढ़ाई कर सके।
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- युकेश सिंह बिष्ट, बीए द्वितीय वर्ष
कॉलेज में बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी कक्षाएं शुरू की जाएं
सरकार ने लमगड़ा में महाविद्यालय तो खोल दिया लेकिन यहां बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी की कक्षाओं के संचालन को स्वीकृति नहीं दी है। इस कारण क्षेत्र में बच्चे वाणिज्य और विज्ञान वर्ग की पढ़ाई करने से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर छात्रों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है। इस कारण वह शहरों में भी पढ़ाई के लिए नहीं जा सकते हैं। कॉलेज में बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी कक्षाएं शुरू की जानी चाहिए।
- सागर पांडे, बीए तृतीय वर्ष