{"_id":"63139cb099d67f5d783a18cb","slug":"new-variety-of-wheat-developed-by-vpkass-almora-news-hld4745520178","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीपीकेएएस ने विकसित की गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वीपीकेएएस ने विकसित की गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041
विज्ञापन
गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041। संवाद
- फोटो : ALMORA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। बिस्किट बनाने वाली कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा ने गेहूं की एक नई प्रजाति वीएल 2041 विकसित की है। संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों को बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों के लिए गेहूं की यह प्रजाति काफी उपयोगी सिद्ध होने की उम्मीद है।
61वीं अखिल भारतीय गेहूं और जौ शोधकर्ताओं की वार्षिक बैठक में प्रजाति पहचान समिति ने इस प्रजाति की पहचान की। उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर) में गत तीन सालों से हुए कुल 24 वर्षाश्रित और पांच सिंचित अखिल भारतीय परीक्षणों में इस प्रजाति की बिस्किट क्वालिटी (फैलाव गुणांक) 11.07 आया है। यह पूरे देश में सर्वाधिक है।
प्रजाति में औसतन 09.07 प्रतिशत प्रोटीन और इसका दाना (दाना कठोरता सूचकांक 22.6) मुलायम है। सभी गुण इस प्रजाति को बिस्कुट बनाने हेतु अभी तक की सबसे उपयुक्त प्रजाति बनाते हैं।
विज्ञापन
पीला रतुआ रोग के लिए है प्रतिरोधी
अल्मोड़ा। गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041 गेहूं की फसल में लगने वाली नई बीमारी गेहूं का ब्लास्ट रोग के लिए भी मध्यम रूप से प्रतिरोधी है। यह प्रजाति भूरा और पीला रतुआ रोग के लिए प्रतिरोधी है।
संस्थान की ओर से विकसित गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041 की उपज का किसानों को अच्छा दाम मिलने की संभावना है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। उम्मीद है कि गेहूं की वीएल 2041 प्रजाति बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों के लिए फायदेमंद होगी।
डॉ. लक्ष्मीकांत, निदेशक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा
विज्ञापन
61वीं अखिल भारतीय गेहूं और जौ शोधकर्ताओं की वार्षिक बैठक में प्रजाति पहचान समिति ने इस प्रजाति की पहचान की। उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर) में गत तीन सालों से हुए कुल 24 वर्षाश्रित और पांच सिंचित अखिल भारतीय परीक्षणों में इस प्रजाति की बिस्किट क्वालिटी (फैलाव गुणांक) 11.07 आया है। यह पूरे देश में सर्वाधिक है।
विज्ञापन
प्रजाति में औसतन 09.07 प्रतिशत प्रोटीन और इसका दाना (दाना कठोरता सूचकांक 22.6) मुलायम है। सभी गुण इस प्रजाति को बिस्कुट बनाने हेतु अभी तक की सबसे उपयुक्त प्रजाति बनाते हैं।
विज्ञापन
पीला रतुआ रोग के लिए है प्रतिरोधी
अल्मोड़ा। गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041 गेहूं की फसल में लगने वाली नई बीमारी गेहूं का ब्लास्ट रोग के लिए भी मध्यम रूप से प्रतिरोधी है। यह प्रजाति भूरा और पीला रतुआ रोग के लिए प्रतिरोधी है।
संस्थान की ओर से विकसित गेहूं की नई प्रजाति वीएल 2041 की उपज का किसानों को अच्छा दाम मिलने की संभावना है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। उम्मीद है कि गेहूं की वीएल 2041 प्रजाति बिस्कुट बनाने वाली कंपनियों के लिए फायदेमंद होगी।
डॉ. लक्ष्मीकांत, निदेशक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा