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नंदा राजजात यात्रा निर्धारित समय 2026 में ही आयोजित की जाए : युवराज नरेंद्र
Tue, 20 Jan 2026 11:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 20 Jan 2026 11:51 PM IST
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अल्मोड़ा। एशिया की सबसे कठिन धार्मिक और ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा पर विवाद बढ़ गया है। नंदा राजजात समिति गढ़वाल के यात्रा को 2027 में करने के एक तरफा निर्णय का चंद्र वंश के युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह ने कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि नंदा राजजात यात्रा का आयोजन 2026 में होना है लेकिन नंदा राजजात समिति गढ़वाल ने एक पक्षीय निर्णय कर इस यात्रा को 2027 में आयोजित करने और कुमाऊं की नंदा राजजात समिति से वार्ता न कर एक तरफा निर्णय लिया है जो उचित नहीं है। आदिकाल से परंपरा रही है कि कुमाऊं और गढ़वाल के राजाओं की दो राज छनतोलियां इसका प्रतिनिधित्व करती आईं हैं। ऐसे में उत्तराखंड के लाखों लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यात्रा अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित की जानी चाहिए। यात्रा में बदलाव जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा। इससे पौराणिक धार्मिक, इतिहास पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा जो आने वाले समय के लिए परंपरा अनुसार सही नहीं है। हजारों वर्षों की परंपरा को समय के अनुसार अपने निर्धारित 12 वर्षों पर ही यात्रा करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कुछ निर्णय नहीं निकला तो जनभावनाओं का सम्मान करते हुए कुमाऊं में नंदा राजजात यात्रा 2026 में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में प्रदेश सरकार के साथ बैठक कर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि नंदा राजजात यात्रा का आयोजन 2026 में होना है लेकिन नंदा राजजात समिति गढ़वाल ने एक पक्षीय निर्णय कर इस यात्रा को 2027 में आयोजित करने और कुमाऊं की नंदा राजजात समिति से वार्ता न कर एक तरफा निर्णय लिया है जो उचित नहीं है। आदिकाल से परंपरा रही है कि कुमाऊं और गढ़वाल के राजाओं की दो राज छनतोलियां इसका प्रतिनिधित्व करती आईं हैं। ऐसे में उत्तराखंड के लाखों लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यात्रा अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित की जानी चाहिए। यात्रा में बदलाव जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा। इससे पौराणिक धार्मिक, इतिहास पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा जो आने वाले समय के लिए परंपरा अनुसार सही नहीं है। हजारों वर्षों की परंपरा को समय के अनुसार अपने निर्धारित 12 वर्षों पर ही यात्रा करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कुछ निर्णय नहीं निकला तो जनभावनाओं का सम्मान करते हुए कुमाऊं में नंदा राजजात यात्रा 2026 में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में प्रदेश सरकार के साथ बैठक कर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
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