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मेरा बेटा तो वापस नहीं आ सकता, पर हत्यारों को तो कड़ी सजा दो
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 01 Dec 2016 10:39 PM IST
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शोकाकुल राजेश की मां और परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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दस साल पहले जब पति की मौत हुई तो बचुली देवी ने हिम्मत नहीं हारी और अपने बच्चों के सहारे जीवन बिताने लगी। छोटा बेटा राजेश पढ़ाई के बाद एचडीएफसी बैंक में चयनित भी हो गया, लेकिन नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। तीन भाइयों में सबसे छोटे कुशाग्र बुद्धि के राजेश से परिवार को काफी उम्मीद थी। इस घटना के बाद से मां बचुली देवी बुरी तरह टूट चुकी हैं। परिवार के अन्य लोग भी भारी सदमे में हैं। मां का कहना है कि उनका बेटा बहुत खुश मिजाज था उसकी किसी से रंजिश नहीं थी। अब मेरा बेटा तो वापस नहीं आ सकता पर हत्यारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
भनोली तहसील के दुनाड़ गांव निवासी गुसाईं राम के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। गुसांई राम का करीब दस साल पहले निधन हो गया था। परिवार की माली हालत खराब होने के बावजूद भी मां बचुली देवी बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उनका बेहतर भविष्य बनाने को चिंतित रहती थीं। कुछ साल पहले वह परिवार को लेकर अल्मोड़ा आ गईं। इन दिनों वह अल्मोड़ा के दुगालखोला में रह रह रही हैं। उनके साथ रह रही बड़ी बेटी सुनीता आर्य कन्या इंटर कालेज में शिक्षिका हैं और छोटी बेटी भी अल्मोड़ा के ही एक स्कूल से पढ़ाई कर रही है।
बड़ा बेटा सुरेंद्र और मझला बेटा रोशन प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। सबसे छोटा बेटा राजेश बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। नवोदय विद्यालय से इंटर करने के बाद उसने यूएस नगर के लालपुर में रह कर बीबीए किया था। कुछ दिनों पहले ही राजेश का एचडीएफ बैंक में चयन हो गया था और वह जल्दी ही बैंक की नौकरी ज्वाइन करने वाला था। राजेश का बैंक में हो जाने पर परिजन काफी खुश थे, लेकिन राजेश की मौत सेे परिवार की खुशियां छिन गईं हैं। इस घटना से परिजन सदमे में हैं। मां बचुली देवी ने बताया कि उनका बेटा खुश मिजाज और व्यवहार कुशल था। उसकी किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी। उनका कहना है कि अब उनका बेटा तो वापस नहीं आ सकता है पर इस वारदात को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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भनोली तहसील के दुनाड़ गांव निवासी गुसाईं राम के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। गुसांई राम का करीब दस साल पहले निधन हो गया था। परिवार की माली हालत खराब होने के बावजूद भी मां बचुली देवी बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उनका बेहतर भविष्य बनाने को चिंतित रहती थीं। कुछ साल पहले वह परिवार को लेकर अल्मोड़ा आ गईं। इन दिनों वह अल्मोड़ा के दुगालखोला में रह रह रही हैं। उनके साथ रह रही बड़ी बेटी सुनीता आर्य कन्या इंटर कालेज में शिक्षिका हैं और छोटी बेटी भी अल्मोड़ा के ही एक स्कूल से पढ़ाई कर रही है।
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बड़ा बेटा सुरेंद्र और मझला बेटा रोशन प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। सबसे छोटा बेटा राजेश बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। नवोदय विद्यालय से इंटर करने के बाद उसने यूएस नगर के लालपुर में रह कर बीबीए किया था। कुछ दिनों पहले ही राजेश का एचडीएफ बैंक में चयन हो गया था और वह जल्दी ही बैंक की नौकरी ज्वाइन करने वाला था। राजेश का बैंक में हो जाने पर परिजन काफी खुश थे, लेकिन राजेश की मौत सेे परिवार की खुशियां छिन गईं हैं। इस घटना से परिजन सदमे में हैं। मां बचुली देवी ने बताया कि उनका बेटा खुश मिजाज और व्यवहार कुशल था। उसकी किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी। उनका कहना है कि अब उनका बेटा तो वापस नहीं आ सकता है पर इस वारदात को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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