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‘मोदी जी मेरी बेटी का सपना पूरा करो’
Sat, 05 Jan 2019 11:29 PM IST
Almora desk
दीप जोशी अल्मोड़ा।
दीप जोशी अल्मोड़ा।
Published by: Almora desk
Updated Sat, 05 Jan 2019 11:29 PM IST
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मां की हत्या और घर में आग लगने के बाद अदम्य साहस का परिचय देते हुए पूजा ने बदमाशों से अपने दो भाइयों की जान बचाई थी। इसके लिए पूजा को वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। अब उसी पूजा के डॉक्टर बनने के सपने के आड़े आर्थिक मजबूरी आ रही है।
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पूजा के पिता ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बेटी का सपना पूरा करने की गुहार लगाई है। राष्ट्रपति के यहां से पत्र का जवाब तो आया, लेकिन सहायता के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। पिता को अब प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र के जवाब का इंतजार है।
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कैलाश सिंह कबडवाल सिडकुल की एक फैक्ट्री में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। वह बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण पोषण कर रहा है। उनकी बेटी पूजा को वीरता पुरस्कार मिलने के बाद डान बॉस्को गर्ल्स स्कूल आमपड़ाव (नैनीताल) के स्वामी जेके चड्ढा ने उसे 12वीं तक मुफ्त में शिक्षा दी। पूजा ने भी 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए।
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इंटर के बाद पूजा ने डाक्टर बनने का सपना देखा लेकिन आर्थिक स्थिति आड़े आने से सपना अधूरा रह गया है। नीट की कोचिंग की व्यवस्था नहीं होने से उन्होंने बेटी पूजा को एमबी डिग्री कालेज हल्द्वानी में बीएससी में प्रवेश दिलाया है। उसके दोनों छोटे भाई किच्छा के एक शिशु मंदिर में पढ़ रहे हैं। पूजा अब एमएससी, पीएचडी करके कॅरिअर बनाना चाहती हैं लेकिन पढ़ाई जारी रखने के आड़े अब परिवार की खराब माली हालत आड़े आ रही है।
सूझबूझ और साहस से भाइयों को बचाया था पूजा ने
अल्मोड़ा। सोमेश्वर के गांव पच्चीसी में कैलाश कबडवाल का की पत्नी चंपा अपने तीन बच्चों के साथ रहती थी। कैलाश नौकरी के चलते बाहर रहते थे। 24 मई 2006 की रात मोहन सिंह महरा ने घर में घुसकर चंपा की चाकू मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने जेवरात लूट लिए और घटना को अग्निकांड का रूप देने के लिए घर के भीतर आग लगा दी। तीनों बच्चों को मरा मानकर दरवाजा बाहर से बंद करके फरार हो गया। आग लगने पर चंपा की छह वर्षीय बेटी पूजा ने साहस व धैर्य से काम लेते हुए अपने तीन वर्षीय भाई सौरव और डेढ़ वर्षीय सूरज को आग वाले कमरे से निकालकर दूसरे कमरे में ले गई। सुबह जब पड़ोसियों ने दरवाजा खोला तो भयभीत बच्चे बाहर आए और चंपा देवी की हत्या का पता चला। पूजा के चश्मदीद गवाह बनने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।