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ग्रामीण पर्यटन विकास योजना लापता
ब्यूरो /अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Wed, 09 Dec 2015 11:04 PM IST
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प्रदेश के पिछड़े गांवों को पर्यटन के जरिए विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद पांच साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। ग्रामीण पर्यटन विकास योजना के तहत अल्मोड़ा जिले से मवड़ा, मजखाली और दन्या गांवों को चिन्ह्ति किया गया था।
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इन गांवों में चिल्ड्रन पार्क, जड़ी-बूटी, फ्लोरीकल्चर, जलाशय की संभावनाएं तलाशकर इनके संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को सौंपनी थी, लेकिन इस ओर धरातल पर पांच साल बाद भी कोई कार्य नहीं हुआ है। केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने 2010 में उत्तराखंड के पिछड़े गांवों को विकसित करने के लिए विशेष पर्यटन विकास योजना बनाई थी।
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इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को घर बैठे रोजगार मुहैया कराकर उन्हें स्वावलंबी बनाना था। इसके लिए पहले चरण में पूरे प्रदेश में 28 गांव चयनित हुए थे। जबकि कुमाऊं क्षेत्र में 11 गांवों को चिन्ह्ति किया गया था। अल्मोड़ा जिले से दन्या, मवड़ा और मजखाली को इस योजना में शामिल थे।
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इन गांवों में जलाशय बनाने, चिल्ड्रन पार्क निर्माण, चिकित्सीय सेवाएं, संस्कृति केंद्र खोलने, जानकारी कक्ष, सोलर लाइटिंग, स्पोर्ट्स सेंटर, ईको ट्यूरिज्म जैसी पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करना था। इन योजनाओं के संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को देनी थी।
इसके बाद पर्यटन विभाग ने चिन्ह्ति गांवों का भ्रमण कर तमाम संभावनाएं भी तलाशी। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 2011 में अल्मोड़ा जिले की तत्कालीन जिला पर्यटन अधिकारी आभा भट्ट ने मवड़ा गांव का भ्रमण भी किया।
जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य ने बताया कि ग्रामीण पर्यटन विकास योजना के तहत विभागीय स्तर पर कार्य प्रगति पर है। मवड़ा ग्राम विकास समिति के संरक्षक पूर्व राजदूत चंद्रमोहन भंडारी ने बताया कि क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। 2015 में मवड़ा गांव का भ्रमण राज्यपाल महामहिम केके पॉल भी कर चुके हैं।
भंडारी ने बताया कि गगास नदी के किनारे जलाशय, छोटे-छोटे बीच, जड़ी-बूटी प्लांटेशन, प्लांटेशन, प्राकृतिक चिकित्सा, पर्यटक आवासों का निर्माण करने, सिलोर महादेव मंदिर स्थित तीन धारा गगास-रिस्कना-धारा संगम को विकसित करने, विमांडेश्वर, बाराखाम और द्वाराहाट को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव विभाग को दिया था।