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उक्रांद के प्रांतीय चिंतन शिविर में हिमाचल जैसा भू कानून उत्तराखंड में लागू करने सहित कई प्रस्ताव पारित हुवे
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बैजनाथ में उक्रांद के चिंतन शिविर में दूसरे दिन अपनी बात रखते पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी। सं?
- फोटो : GARUD
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गरुड़ (बागेश्वर)। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का दो दिनी चिंतन शिविर रविवार को गरुड़ में संपन्न हो गया। शिविर में पार्टी ने हिमाचल की तर्ज पर भू-कानून लागू कराने, टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का गरुड़ देवनाई चौखुटिया तक विस्तार, राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने समेत कई प्रस्ताव पास किए।
बैजनाथ में एक होटल में संपन्न हुए दो दिनी चिंतन शिविर में राज्य की ज्वलंत समस्याओं पर मंथन हुआ। चिंतन शिविर में सर्वसम्मति से प्रस्तावित टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन का गरुड़ देवनाई होते चौखुटिया तक विस्तार निर्माण करने, राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून लागू करने आदि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
चिंतन शिविर में जल, जंगल, जमीन और बेरोजगारी पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने राज्य गठन से अब तक हुई नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक उम्मीद के अनुसार विकास नहीं हुआ। सरकार सालों से राज्य आंदोलनकारियों का अपमान करते आ रही है।
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वक्ताओं ने अंकिता हत्याकांड, यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाला, विधानसभा में हुई फर्जी नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और द्वाराहाट के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस लगातार राज्य का दोहन करते आ रही हैं। राज्य में कानून नाम की कोई चीज नहीं है। बढ़ती बेरोजगारी से पलायन दर में हर साल वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान परेशान हैं।
शिविर में एडवोकेट डीके जोशी, अनिरुद्ध काला, नंदाबल्लभ भट्ट, भुवन कांडपाल, राजेंद्र थायत, पूरन रावत, गोपाल वनवासी, विनोद पांडे, मोहन सिंह बिष्ट, महेश पांडे, हरीश पांडे, प्रमोद मेहता, पंकज जोशी, विपिन बिष्ट, लक्ष्मण राम, पूरन रावत आदि ने विचार रखे।
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बैजनाथ में एक होटल में संपन्न हुए दो दिनी चिंतन शिविर में राज्य की ज्वलंत समस्याओं पर मंथन हुआ। चिंतन शिविर में सर्वसम्मति से प्रस्तावित टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन का गरुड़ देवनाई होते चौखुटिया तक विस्तार निर्माण करने, राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून लागू करने आदि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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चिंतन शिविर में जल, जंगल, जमीन और बेरोजगारी पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने राज्य गठन से अब तक हुई नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक उम्मीद के अनुसार विकास नहीं हुआ। सरकार सालों से राज्य आंदोलनकारियों का अपमान करते आ रही है।
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वक्ताओं ने अंकिता हत्याकांड, यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाला, विधानसभा में हुई फर्जी नियुक्तियों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और द्वाराहाट के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस लगातार राज्य का दोहन करते आ रही हैं। राज्य में कानून नाम की कोई चीज नहीं है। बढ़ती बेरोजगारी से पलायन दर में हर साल वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान परेशान हैं।
शिविर में एडवोकेट डीके जोशी, अनिरुद्ध काला, नंदाबल्लभ भट्ट, भुवन कांडपाल, राजेंद्र थायत, पूरन रावत, गोपाल वनवासी, विनोद पांडे, मोहन सिंह बिष्ट, महेश पांडे, हरीश पांडे, प्रमोद मेहता, पंकज जोशी, विपिन बिष्ट, लक्ष्मण राम, पूरन रावत आदि ने विचार रखे।