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उत्तराखंड बनने के बाद भी कई पर्यटन स्थल उपेक्षित
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:22 PM IST
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पर्यटन की दृष्टि से जिले में आज भी कई स्थान उपेक्षित हैं। इन स्थानों पर पर्यटन विकास की काफी संभावनाएं हैं। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आशा थी कि सरकार और जनप्रतिनिधि इन अछूते पर्यटन स्थलों के विकास की ओर ध्यान देंगे, जिससे कि पर्यटन व्यवसाय के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, परंतु सुविधाओं और जानकारी के अभाव में इन स्थानों तक पर्यटक पहुंच नहीं पाते हैं।
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अल्मोड़ा जिले में कई धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं, जो कि अच्छे पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जा सकते हैं पर राज्य बनने के सत्रह साल बीतने के बाद भी यह स्थान उपेक्षित हैं। प्रसिद्ध जागेश्वर धाम के समीप ही झांकरसैम और वृद्ध जागेश्वर मंदिर हैं। यह दोनों स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण हैं। ऊंची पहाड़ी पर स्थित वृद्ध जागेश्वर मंदिर से हिमालय की चोटियों की लंबी श्रंखला लोगों को काफी आकर्षिक करती है, परंतु इन दोनों स्थानों पर सुविधाओं का अभाव है।
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अल्मोड़ा शहर के पूर्वी छोर पर कत्यूरी राजाओं द्वारा नवीं शताब्दी में बनाया गया खगमराकोट ह। यहां पर अब विभिन्न देवी देवताओं के मंदिर हैं। धारानौला मार्ग से खगमराकोट को जोडने वाला पैदल मार्ग खस्ताहाल है। करबला से कुछ दूरी पर दव्ेवली डांडा में देवी मंदिर है। यह स्थल एक अच्छे पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित हो सकता है। वहीं लमगड़ा के समीप पहाड़ी पर बानरी देवी और हवालबाग विकासखंड के अंतर्गत स्याही देवी मंदिर पर्यटक स्थल हैं पर इन स्थानों पर सुविधाओं और जानकारी के अभाव में पर्यटकों नहीं पहुंच पाते हैं। वहीं सोमेश्वर से करीब पांच किमी दूरी पर ऐड़ाद्यो पर्वत में ऐड़ा देवी का मंदिर, अल्मोड़ा से 47 किमी दूरी पर ताकुला के निकट गणानाथ मंदिर और प्राचीन प्राकृतिक गुफा भी है। यह स्थल भी विकसित नहीं हो पाए हैं।
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शीतलाखेत, सल्ट, जलना, द्वाराहाट, करबला, दुगालखोला, द्वाराहाट में साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं। करीब एक करोड़ लागत से जिले में अन्य स्थानों पर भी सूचना पट लगाने के साथ ही शौचालय, व्यू प्वाइंट और बैंच लगाने का कार्य प्रगति पर है, ताकि पर्यटकों को सुविधा मिल सके।
कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, अल्मोड़ा।