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Almora News: राजौरी में सर्च ऑपरेशन के दौरान अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद, दो दिन बाद बनने वाले थे कैप्टन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:01 PM IST
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Lieutenant Bireshwar Goswami of Almora was martyred during a search operation in Rajouri. He was to become a Captain two days later.
अल्मोड़ा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अल्मोड़ा के एक जांबाज सैन्य अधिकारी ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। भारतीय सेना की 5 असम रेजिमेंट में तैनात 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ऑपरेशन शेरावाली के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दुखद खबर के बाद से शहीद के गृह जनपद अल्मोड़ा सहित पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है।
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जानकारी के अनुसार राजौरी के दोरीमाल-गंभीर मुगलान क्षेत्र के घने जंगलों में पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ मई के अंतिम सप्ताह से ऑपरेशन शेरावाली चलाया जा रहा है। शनिवार शाम लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी एक तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर अचानक पैर फिसलने से वे गहरी खाई में जा गिरे। साथी जवानों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें बाहर निकाला लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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दो दिन बाद बनने वाले थे कैप्टन
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सैन्य कॅरिअर बेहद उज्ज्वल था। जनवरी 2023 में सेना में शामिल होने के बाद जून 2024 में उन्हें कमीशन मिला था। अत्यंत गर्व और दुख की बात यह है कि ठीक दो दिन बाद ही उनकी कैप्टन पद पर पदोन्नति (प्रमोशन) होने वाली थी। परिवार और सहकर्मी इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रहे थे लेकिन इससे पहले ही वे देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे गए।
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मेधावी छात्र और गौरवशाली पृष्ठभूमि
शहीद बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा के बगवालीपोखर (बाड़ी) के निवासी थे और वर्तमान में उनका परिवार पांडेखोला (अथरबनी) में रहता है। उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में प्रशासनिक अधिकारी हैं और माता सरस्वती गोस्वामी प्राथमिक विद्यालय वल्सा में शिक्षिका हैं।
देश सेवा को दी प्राथमिकता
बीरेश्वर बचपन से ही बेहद मेधावी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से हुई। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातक के दौरान वे सिल्वर मेडलिस्ट रहे। एनडीए पास करने के साथ उनका चयन कैट, एनएलयू और इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी के लिए भी हुआ था लेकिन उन्होंने देश सेवा को चुना।


क्षेत्र में शोक, दिग्गजों ने जताई संवेदना
मात्र 25 वर्ष की आयु में बीरेश्वर की शहादत की खबर से माता-पिता और बड़े भाई अमित गोस्वामी सहित पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी शहादत पर केंद्रीय राज्य मंत्री/सांसद अजय टम्टा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंज्वाल, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, ग्राम प्रधान विनोद जोशी, डीजीसी पूरन कैड़ा सहित तमाम जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद को नमन किया है।
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