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कोसी बैराज के गेट में पत्थर फंसने से सांसें अटकी
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 29 Apr 2016 11:11 PM IST
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कोसी बैराज से लीक होता पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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कोसी बैराज में पानी रोकने वाले गेट नंबर दो के निचले तल में कोई पत्थर फंस जाने से तेजी से पानी बहने लगा। इससे अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में बैराज टूट जाने की अफवाह फैल गई। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी, एसएसपी समेत आईटीबीपी, आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सेना की टुकड़ी को भी मौके पर बुला लिया गया।
सिंचाई विभाग ने बैराज से नीचे क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। ढाई घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह गेट पूरी तरह बंद हो जाने से पानी का बहाव बंद हुआ। इसके बाद प्रशासन को राहत मिली।
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जानकारी के मुताबिक कोसी बैराज के गेट नंबर दो से निर्धारित मात्रा से कुछ अधिक पानी बह रहा था। पानी रोकने के लिए अपराह्न करीब डेढ़ बजे सिंचाई विभाग के कर्मियों ने गेट को कुछ सेंटीमीटर ऊपर उठाया, ताकि गेट के निचले तल पर फंसे पत्थर आदि बहाव के साथ निकल सकें। कुछ देर बाद गेट डाउन किया, लेकिन वह पूरी तरह बंद नहीं हुआ और पानी तेजी से निकलने लगा। कर्मचारियों ने इसकी सूचना विभाग के अधीक्षण अभियंता पीसी मेलकानी और अधी
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शासी अभियंता नवीन सिंघल को दी। दोनों अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। विभाग ने सुरक्षा के दृष्टि से बैराज के निचले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया। कुछ ही देर में कोसी बैराज टूट जाने की अफवाह उड़ गई। जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। डीएम सविन बंसल, एसएसपी केएस नगन्याल, सीडीओ प्रकाश चंद, एसडीएम विवेक राय सहित पुलिस प्रशासन के तमाम अफसर मौके पर पहुंच गए।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सेना और आईटीबीपी की टुकड़ी को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद नाइन कुमाऊं के कमांडेंट कर्नल पी रोमेश, कर्नल मयंक दुबे आईटीबीपी के सहायक कमांडेंट पुनीत सचदेवा समेत सेना, आईटीबीपी, पुलिस आपदा प्रबंधन टीम के कर्मचारी और जवान मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर विधायक मनोज तिवारी और कई अन्य जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। जवानों ने बैराज के गेट को कई बार ऊपर उठाकर नीचे गिराया। काफी कोशिशों के बाद आखिरकार करीब चार बजे गेट कोपूरी तरह नीचे बैठा दिया गया और पानी का बहाव पूरी तरह रुक गया। गेट बंद होने पर प्रशासन के अफसरों सहित सभी ने राहत की सांस ली।
आपदा प्रबंधन अधिकारी खुद रस्सियों के सहारे नीचे उतरे
अल्मोड़ा। सिंचाई विभाग को कोसी बैराज के गेट के नीचे कोई पत्थर आदि फंस जाने का अंदेशा था। पत्थर हटाने के लिए आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी और आईटीबीपी का एक जवान रस्सियों के सहारे मुहाने पर उतर गए। उन्होंने अवरोध हटाकर गेट खोलने का काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
हेलीकॉप्टर के जरिये गोताखोर बुलाने की कर ली थी तैयारी
अल्मोड़ा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन अधिकारियों ने शासन में संपर्क कर देहरादून से गोताखोर भेजने की मांग की। बताया जाता है कि शासन ने हेलीकॉप्टर के जरिए गोताखोरों को मौके पर भेजने की व्यवस्था कर ली थी। समय रहते गेट के पूरी तरह नदी तल में बैठ जाने से पानी की अनचाही निकासी रुक गई। इसके बाद गोताखोरों को देहरादून में ही रोक लिया गया। बैराज से तेजी से बह रहे पानी को गंभीरता को देखते हुए बैराज के भीतर जमा पानी में गोताखोरों को उतारने का निर्णय लिया गया। मालूम हो कि स्थानीय स्तर पर सेना, पुलिर्स आइ्टीबीपी, एसएसबी के पास गोताखोर उपलब्ध नहीं हैं।