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भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहे निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:56 PM IST
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जिले के भैंसियाछाना ब्लाक के खैरखेत में पहाड़ी से हो रहा भूस्खलन।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में भूस्खलन की दृष्टि कई क्षेत्र संवेदनशील हैं, लेकिन इसके बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य होते रहते हैं। निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के लिए सरकार कोई नीति नहीं बना सकी है।
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आपदा की दृष्टि से जिले के कई गांव काफी संवेदनशील हैं। आपदा आने से वर्ष 2010 में जिले में विभिन्न स्थानों पर 36 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों की संख्या में जानवर मारे गए थे। कई गांव भूस्खलन की चपेट में आए थे। अकेले देवली और बल्टा गांव में ही भूस्खलन से एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए थे। हवालबाग ब्लॉक के खत्याड़ी ग्राम पंचायत में पिछले दशक में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन वहां अभी भी धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी हैं।
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भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर अंकुश लगाने में सरकार असफल ही साबित हो रही है। खत्याड़ी, बूढ़ाधार समेत अन्य क्षेत्रों के संवेदनशील होने के बावजूद वहां पर निर्माण कार्य जारी हैं। इससे भविष्य में कभी भी गंभीर खतरा हो सकता है, लेकिन शासन प्रशासन इस पर रोक लगाने में असफल ही साबित हो रहा है।
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242 परिवारों का सालों बाद भी विस्थापन नहीं
अल्मोड़ा। जिले में कई क्षेत्र आपदा की दृष्टि से काफी संवेदनशील बने हुए हैं। वर्षों बाद भी जिले में आपदा प्रभावित 14 गांवों के 242 परिवारों का अब तक विस्थापन नहीं हो पाया है। इनमें अल्मोड़ा तहसील के अंतर्गत भैंसियाछाना ग्राम पंचायत के तोक खैरखेत में छह, बूढ़ाधार के 50 परिवारों के अलावा अन्य ब्लॉकों में ग्राम पंचायत बल्टा के 28, बल्टाबाड़ी के चार, सिराड़ के 14, देवली के छह, भूल्यूड़ा के चार, मालता के तीन, बजेठी के 10 परिवारों आपदा प्रभावित हैं। 2013 में आपदा से जिले में पुन: कई स्थानों पर नुकसान हुआ। अल्मोड़ा तहसील के ल्वेटा में 15 परिवार, थालागूंठ में नौ परिवार, सल्ट तहसील के रडगाड़ के छह, पनुवाद्योखन के 14 चौखुटिया के बसरखेत के 13, रानीखेत तहसील में इंद्रा बस्ती के 42 परिवारों के मकान भूस्खलन की चपेट में हैं। इन परिवारों की पंचायत घरों, स्कूलों और किराए के मकानों में रहना मजबूरी है। प्रभावित परिवारों के लोग विस्थापन की मांग को लेकर कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं पर अब तक विस्थापन नहीं हो पाया है।
अति संवेदनशील श्रेणी के आपदा प्रभावित गांव
ग्राम पंचायत भैंसियाछाना के तोक खैरखेत और बूढ़ाधार के 56 परिवार। ग्राम पंचायत बल्टा के 28 परिवार, ल्वेटा ग्राम पंचायत के 15 परिवार।
आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन के लिए भूमि चयनित कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अतिसंवेदनशील क्षेत्र बूढ़ाधार और खैरखेत गांव के विस्थापन के लिए चयनित भूमि के वन भूमि प्रपत्रों को नोडल स्तर से मंजूरी मिल गई है। वन भूमि प्रपत्रों को अब भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्यवाही होगी।
- राकेश जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, अल्मोड़ा।