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परीक्षाओं में आने चाहिए कुमाऊंनी, गढ़वाली प्रश्न: कुंजवाल
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Sun, 05 Nov 2017 09:17 PM IST
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कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में मंचासीन अतिथिगण।
- फोटो : अमर उजाला
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कुमाऊंनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन संपन्न हो गया। मुख्य अतिथि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं में भी कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा, संस्कृति से संबंधित प्रश्न पूछे जाने चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊंनी में मीठे बोल बोलने वाले नेताओं को भी भाषा के विकास के लिए काम करना चाहिए। समापन मौके पर काव्य गोष्ठी का आयोजन और साहित्यकारों को पुरस्कृत किया गया।
कुंदन लाल प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा के लिए समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने आश्वासन दिया कि कुमाऊंनी भाषा को विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए वह स्वयं भी प्रयास जारी रखेंगे। पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने बताया कि 1998 में एक सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में 26 लाख, 60 हजार लोग कुमाऊंनी भाषी थे।
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कूर्मांचल कुमाऊंनी साप्ताहिक अखबार के संपादक डा. चंद्र प्रकाश फुलोरिया ने कहा कि रोजगार परक परीक्षाओं में कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जाने चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती महरा ने कुमाऊंनी भाषा को घरों में भी बोलने की आदत डालने पर जोर दिया। अध्यक्षता देव सिंह पिलख्वाल ने की।
इससे पूर्व सम्मेलन के द्वितीय दिवस के सायंकालीन सत्र में साहित्यकार घनानंद पांडे की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। कवि गोष्ठी में दामोदर जोशी, शिवचरण पांडे, त्रिभुवन गिरि, मोहन जोशी, तारादत्त तिवारी, महेंद्र ठकुराठी, देवकीनंदन, दीपा गोबाड़ी, विनोद पंत, रमेश पर्वतीय, जुगल किशोर पेटशाली, डा. हेमचंद्र दूबे, मोहन कार्की, बिशन दत्त जोशी ने काव्यपाठ किया। संचालन नीरज पंत और डा. हयात सिंह रावत ने किया।
साहित्यकार और रचनाकार हुए सम्मानित
कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में साहित्यकार मोहन चंद्र कबडवाल को शंकरलाल साह कुमाऊंनी निबंध लेखन और जगदीश जोशी को कालू सिंह अनुवाद लेखन में पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा डा. रमेश चंद्र पांडे राजन और घनानंद पांडे को बहादुर सिंह बनौला स्मृति कुमाऊंनी साहित्यसेवी सम्मान, शिवचरण पांडे, शिरीष पांडे को पुष्पलता जोशी स्मृति, कलाकार नारायण सिंह थापा, नंदलाल आर्य और प्रहलाद मेहरा को वैद्य कल्याण सिंह बिष्ट स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डा. प्रीति आर्या, कृपाल सिंह शीला, डा. हेम चंद्र दूबे आदि रचनाकार भी सम्मानित हुए।
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वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊंनी में मीठे बोल बोलने वाले नेताओं को भी भाषा के विकास के लिए काम करना चाहिए। समापन मौके पर काव्य गोष्ठी का आयोजन और साहित्यकारों को पुरस्कृत किया गया।
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कुंदन लाल प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा के लिए समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने आश्वासन दिया कि कुमाऊंनी भाषा को विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए वह स्वयं भी प्रयास जारी रखेंगे। पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने बताया कि 1998 में एक सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में 26 लाख, 60 हजार लोग कुमाऊंनी भाषी थे।
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कूर्मांचल कुमाऊंनी साप्ताहिक अखबार के संपादक डा. चंद्र प्रकाश फुलोरिया ने कहा कि रोजगार परक परीक्षाओं में कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जाने चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती महरा ने कुमाऊंनी भाषा को घरों में भी बोलने की आदत डालने पर जोर दिया। अध्यक्षता देव सिंह पिलख्वाल ने की।
इससे पूर्व सम्मेलन के द्वितीय दिवस के सायंकालीन सत्र में साहित्यकार घनानंद पांडे की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। कवि गोष्ठी में दामोदर जोशी, शिवचरण पांडे, त्रिभुवन गिरि, मोहन जोशी, तारादत्त तिवारी, महेंद्र ठकुराठी, देवकीनंदन, दीपा गोबाड़ी, विनोद पंत, रमेश पर्वतीय, जुगल किशोर पेटशाली, डा. हेमचंद्र दूबे, मोहन कार्की, बिशन दत्त जोशी ने काव्यपाठ किया। संचालन नीरज पंत और डा. हयात सिंह रावत ने किया।
साहित्यकार और रचनाकार हुए सम्मानित
कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में साहित्यकार मोहन चंद्र कबडवाल को शंकरलाल साह कुमाऊंनी निबंध लेखन और जगदीश जोशी को कालू सिंह अनुवाद लेखन में पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा डा. रमेश चंद्र पांडे राजन और घनानंद पांडे को बहादुर सिंह बनौला स्मृति कुमाऊंनी साहित्यसेवी सम्मान, शिवचरण पांडे, शिरीष पांडे को पुष्पलता जोशी स्मृति, कलाकार नारायण सिंह थापा, नंदलाल आर्य और प्रहलाद मेहरा को वैद्य कल्याण सिंह बिष्ट स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डा. प्रीति आर्या, कृपाल सिंह शीला, डा. हेम चंद्र दूबे आदि रचनाकार भी सम्मानित हुए।