दो साल में जैविक तरीकों से पुनर्जीवित होगी कोसी : प्रो. रावत

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Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2020 12:13 AM IST
अल्मोड़ा के जीआईसी नाई में हुई कार्यशाला में मौजूद छात्र-छात्राएं।
अल्मोड़ा के जीआईसी नाई में हुई कार्यशाला में मौजूद छात्र-छात्राएं। - फोटो : ALMORA

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अल्मोड़ा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेचुरल रिसोर्स डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (एनआरडीएमएस) के निदेशक और एसएसजे परिसर के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. जेएस रावत ने कहा यांत्रिक और जैविक तरीकों से कोसी नदी को दो साल के भीतर पुनर्जीवित किया जाएगा।
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उत्तराखंड विज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) की ओर से जीआईसी नाई में कोसी नदी संरक्षण और पुनर्जनन विषय पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कोसी नदी रिचार्ज को 14 जोनों में बांटा गया है। नाई क्षेत्र गणानाथ रिचार्ज जोन के तहत आता है। कोसी नदी को तभी बचा सकते हैं जब भूमिगत जलस्तर में वृद्धि हो। -

चार उपायों से होगी भूमिगत जल में वृद्धि
यांत्रिक उपायों के तहत चार उपायों द्वारा भूमिगत जल में वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए रिचार्ज जोन की भूमि में छोटे-छोटे छिद्र बनाने, जल सोखता गड्ढों का निर्माण, बरसाती नालों में पिरुल बांध बनाने, मौसमी गधेरे में पक्के चैकडैम बनाए जाएं। जैविक उपायों के तहत पौधरोपण, नेपियर घास, झाड़ियां लगाने पर जोर दिया। इन उपायों से कोसी नदी को दो तीन वर्षों में पुनर्जीवित करने में कामयाब हो पाएंगे। विशिष्ट अतिथि वन क्षेत्राधिकारी और कोसी पुनर्जनन अभियान की रिसोर्स पर्सन संचिता वर्मा ने कोसी पुनर्जनन अभियान के तहत पौधारोपण पर जोर दिया।
ये लोग रहे मौजूद
वहां बीईओ किशन राम आर्य, जिपं. सदस्य सुनोली योगेश चंद्र, कार्यशाला संयोजक भूगोल प्रवक्ता रमेश सिंह रावत, प्रधानाचार्य अनिल कुमार कठेरिया, डॉ. पवनेश ठकुराठी, नवल किशोर, तारा अल्मिया, सोनिया कोहली, सोनम देवी, भूपेंद्र नयाल, प्रताप बिष्ट, कुंदन सिंह, मोहित बिष्ट, रोहित सिंह, हरीश जोशी, बलवीर भाकुनी, बालम बिष्ट, दलीप कुमार, भारती जीना, अर्जुन सिंह, नीमा बिष्ट, हरीश मेलकानी, संतोष सिंह, दीपक शर्मा, जानकी देवी, शोभा बिष्ट मौजूद थे।
आकर्षण का केंद्र रही प्रदर्शनी
अल्मोड़ा। कार्यशाला में कोसी नदी पुनर्जनन अभियान से संबंधित चित्रों और निबंधों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। पूरन सिंह नयाल और पीटीए अध्यक्ष नरेंद्र अल्मियां के प्रयासों से पहुंचे कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संचालन इंद्रेश पांडे ने किया।

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