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महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं कर्मठ किसान कमला
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:10 PM IST
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खेतों में छिड़काव करतीं किसान कमला।
- फोटो : अमर उजाला
ग्राम कवाधार निवासी कर्मठ किसान कमला मेहरा खेती-किसानी और पशुपालन के माध्यम से महिलाओं की प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। कहती हैं कि खेती में बंदर, सुअरों की समस्या से जूझने के बावजूद सालभर में पचास हजार का अनाज बेच लेती हैं। नित नए प्रयोग करती हैं, पूसा बासमती की डेढ़ क्विंटल की उपज इसी का परिणाम है। कहती हैं कि किसानी के गुर उन्होंने अपने पिता झलां निवासी लक्ष्मण सिंह भाकुनी से सीखे। उनके दो पूर्व फौजी भाई और भाभियां भी अच्छे कृषक हैं।
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ग्राम पंचायत हाट के कवाधर निवासी कमला मेहरा का विवाह महज चौदह साल की उम्र में हो गया था। पिता बड़े किसान थे सो कमला ने किसानी के गुर पिता से ही सीख लिए थे। शादी के बाद उनके बताए रास्ते पर चलते हुए ससुराल की अपनी पंद्रह नाली भूमि में गेहूं, धान और सरसों आदि की खेती शुरू कर दी।
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कमला देवी के पति चौखुटिया के चांदीखेत में दुकान चलाते हैं। बताती हैं कि सालभर में पचास हजार का अनाज बेच लेती हैं। बंदर, सुअरों को वह परंपरागत खेती के लिए सबसे बड़ी समस्या बताती हैं। कहती हैं कि उन्होंने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना की तकनीकी संस्था आईएफएफडीसी के सहयोग से नए प्रयोग के तौर पर छह किलोग्राम बीज से डेढ़ क्विंटल पूसा बासमती का उत्पादन किया। कमला देवी बताती हैं कि वह सात महिलाओं के समूह के माध्यम से लहसुन, अदरक, हल्दी आदि की खेती भी कर रही हैं, इससे भी समूह की काफी आमदनी हो रही है।
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