फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Khadi's shine faded

पहाड़ में गांधी की खादी की चमक हो रही फीकी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 11:06 PM IST
विज्ञापन
Khadi's shine faded
अल्मोड़ा का गांधी आश्रम - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। एक जमाने में लोग गांधी आश्रमों में जाकर खादी के वस्त्रों की खूब खरीदारी करते थे। गर्मियों में सूती, ऊनी वस्त्रों में कुर्ते, पायजामे हों या फिर जाड़ों में कोट, स्वेटर, टोपी समेत शॉल, कंबलों की खूब डिमांड हुआ करती थी। लेकिन इधर कुछ सालों में पहाड़ में गांधी आश्रमों की स्थिति ठीक नहीं है। 2014 में पहाड़ के गांधी आश्रमों में 117 कर्मचारी कार्यरत थे जो घटकर अब 88 रह गए हैं। इसी तरह कृत्रिम बुनकरों की संख्या भी 580 से घटकर 320 रह गई है। इससे उत्पादन और बिक्री दोनों घट गए हैं।
विज्ञापन

गांधी आश्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि बीते सालों में जीएसटी से माल काफी महंगा हो गया है। जिसके कारण सामान भी कम आ रहा है और उत्पादन भी घटा है। कामकाज ढीला होने से बुनकर भी कम होते चले गए। इधर कर्मचारियों को पेंशन की सुविधा भी नहीं है। 30 से 35 साल की नौकरी के बाद भी कर्मचारियों का वेतन 12 से 14 हजार के बीच ही है।
विज्ञापन

गांधी आश्रम चनौदा के अंतर्गत आने वाले अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में 2013-14 में 117 कर्मचारी कार्यरत थे। जो वर्ष 18-19 में केवल 88 रह गए हैं। कामगार (कृत्रिम बुनकर) की संख्या 2013-14 में 580 थी जो अब केवल 320 रह गई है। इसी तरह 2013-14 में उत्पादन 212.45 लाख का था जो अब घटकर मात्र 57.29 लाख रह गया है। यही हाल बिक्री में भी है। 2013-14 में खादी सामान की बिक्री 692.47 लाख में थी जो वर्ष 2018-19 में 359.47 लाख रह गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इधर अल्मोड़ा गांधी आश्रम के मैनेजर उमेश चंद्र जोशी का कहना है कि जीएसटी के कारण माल महंगा हो गया है। जिससे उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed