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कूड़े और गंदगी से पटी है जटागंगा नदी

Mon, 25 Apr 2016 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 25 Apr 2016 10:54 PM IST
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Jtaganga river is full of litter and dirt
जटागंगा में कूड़ा - फोटो : अमर उजाला

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 पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन भी समय-समय पर स्वच्छता को लेकर दावे करते रहता है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। प्रसिद्ध जागेश्वर धाम स्थित जटागंगा नदी का धार्मिक महत्व होने के साथ ही यह नदी स्थानीय गांवों की पेयजलापूर्ति का एकमात्र साधन है। कूड़ा और शवदाह के बाद अधजली लकड़ियां, गंदगी से जटागंगा नदी पटी हुई है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 
जागेश्वर धाम स्थित मंदिरों के साथ ही जटागंगा नदी का भी धार्मिक महत्व है। इस नदी से धौलादेवी ब्लॉक के कई गांवों के लिए पांच पेयजल लाइनें भी बनी हैं। मंदिर परिसर के पास ही नदी किनारे श्मशान घाट है। जागेश्वर कस्बे में सीवर लाइन नहीं है। बाजार और घरों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। गंदा पानी और कूड़ा नदी किनारे जहां-तहां बिखरा पड़ा है। श्मशान घाट के आसपास अधजली लकड़ियां, कोयला, राख, मृतकों के कपड़े, दवाओं के पैकेट, पानी की खाली बोतलें, पॉलिथीन समेत अन्य गंदगी से जहां क्षेत्र की सुंदरता पर ग्रहण लग रहा है, वहीं नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। 
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पर्यावरण संवर्द्धन के लिए एनजीटी ने कड़े नियम बना रखे हैं। नियमानुसार गंदा पानी, कूड़ा समेत अन्य प्रकार की गंदगी को नदी में जाने से रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। कभी कभार बैठकें, सफाई अभियान और गोष्ठियां आयोजित कर प्रशासन इस मामले में गंभीर होने का दिखावा करता है, लेकिन हकीकत में प्रशासन की पहल निष्प्रभावी हो रही है। 
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ग्राम पंचायत के पास संसाधनों का अभाव है। फिर भी पंचायत की ओर से समय-समय पर नदी की गंदगी हटाने का अभियान चलाया जाता है। कस्बे में सीवर लाइन और जटागंगा नदी में बैराज निर्माण की मांग को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। दिसंबर महीने में जागेश्वर आगमन पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने बैराज निर्माण की घोषणा भी की थी, लेकिन सरकार की अस्थिरता के चलते मामला अधर में लटक गया है। 
- हरिमोहन भट्ट, ग्राम प्रधान, जागेश्वर। 

 
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