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Almora News: जागेश्वर धाम में घृत गुफा परंपरा, 2.5 क्विंटल घी से ढका ज्योर्तिलिंग
Wed, 14 Jan 2026 09:22 PM IST
गायत्री जोशी
संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: गायत्री जोशी
Updated Wed, 14 Jan 2026 09:22 PM IST
सार
मकर संक्रांति के अवसर पर अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में प्राचीन परंपरा के तहत ज्योर्तिलिंग को 2.5 क्विंटल घी से ढककर घृत गुफा का स्वरूप दिया गया।
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जागेश्वर धाम में घृत गुफा में विराजे भोलेनाथ।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम के ज्योर्तिलिंग को 2.5 क्विंटल घी से एक महीने के लिए ढक दिया गया है। एक महीने बाद संक्रांति के दिन शिवलिंग को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
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पुजारियों के मुताबिक भगवान भोलेनाथ मकर संक्रांति के दिन एक महीने के लिए गुफा में तपस्या में लीन हो जाते हैं। प्राचीन परंपरा के अनुसार माघ मास की संक्रांति के अवसर पर गाय के घी को खौलते पानी में उबालकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद घी से ज्योर्तिलिंग को ढककर गुफा का रूप दिया जाता है। बुधवार को जागेश्वर धाम के सभी पुजारियों ने 2.5 क्विंटल शुद्ध गाय के घी को पानी में उबालकर शुद्ध किया। इस घी से गुफा तैयार की गई और भोलेनाथ को इसमें पदार्पित किया गया। पुजारियों ने बताया कि घृत गुफा में भगवान शिव का यह स्वरूप अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दौरान महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज, पंडित शुभम भट्ट, नवीन चंद्र भट्ट, आचार्य गोकुल भट्ट, हरीश भट्ट, विनोद भट्ट, भगवान भट्ट, कैलाश भट्ट, तारा भट्ट, गिरीश भट्ट, शेखर भट्ट, ललित भट्ट, अभिषेक भट्ट आदि मौजूद रहे।
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मकर संक्रांति पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
मकर संक्रांति (उत्तरायणी) का पर्व बुधवार को जिले में उल्लास से मनाया गया। लोगों ने मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना कर परिवार के सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। जागेश्वर धाम में भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को दर्शनों के लिए कतार में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
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कड़ाके की ठंड के बीच लोगों ने प्रात:काल स्थानीय नदियों के संगम पर स्नान किया। सुबह से ही जागेश्वर धाम, चितई और जिले के अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जागेश्वर धाम के ब्रह्माकुंड स्थल के समीप 100 से अधिक लोगों का जनेऊ संस्कार किया गया। पंडितों ने बटुकों को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संस्कार दीक्षा दी। इस दौरान यज्ञ कर सुख शांति की कामना की गई। जागेश्वर धाम में सुरक्षा के चलते सुरक्षा बल मौजूद रहा।