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चौखुटिया में इस्कॉन की जगन्नाथ रथयात्रा

Sun, 04 Sep 2016 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)। Updated Sun, 04 Sep 2016 11:09 PM IST
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Jagannath Rath Yatra by ISKCON in Chaukhutia
चौखुटिया में इस्कॉन की जगन्नाथ रथयात्रा - फोटो : अमर उजाला

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। भटकोट के प्रयागेश्वर धाम से भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा में तमाम लोग शामिल हुए। कुछ ने घरों तथा ऊंची इमारतों की छतों आदि अन्य स्थानों से भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। यात्रा के दौरान पूरा माहौल कृष्णमय हो गया।

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अगनेरी मंदिर में विशाल भंडारे के साथ समापन हुआ। इस्कॉन की ओर से पांचवीं बार आयोजित भगवान जगन्नाथ, बलदेव तथा सुभद्रा की रथ यात्रा रविवार को भटकोट के प्रयागेश्वर मंदिर से ध्वजों के साथ शुरू हुई। यात्रा चांदीखेत तथा चौखुटिया बाजार से होते हुए करीब चार किमी चलकर अगनेरी मंदिर पहुंची।
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रथ को दो विशाल मोटी रस्सियों से बांधा गया था। जिसे खींचने के लिए दोनों तरफ से लोग कतारबद्ध थे। सभी लोग जय जय जगन्नाथ स्वामी तथा हरे रामा हरे कृष्णा जैसे भजन गाते झूम रहे थे।
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देश विदेश से आए संतजगण हारमोनियम, मृदंग, करताल, झांज तथा झाली के अलावा घंटा तथा शंख बजाते चल रहे थे। इससे पूर्व नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ हुआ।अगनेरी मंदिर परिसर के निकट विशाल भंडारे के साथ यात्रा का समापन हुआ। संयोजक गोविंद दास ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। यात्रा में स्पेन से गोपाल प्रभु, मणिपुर से रामानुज प्रभु, राजस्थान से श्रीराम प्रभु, हरियाणा से आशीष प्रभु, कलकत्ता से कृष्ण सखा प्रभु, गौरगुणमणी प्रभु, सीता कांत प्रभु, उड़ीसा से परमहंस प्रभु, वृंदावन से पीतांबर प्रभु के अलावा संयोजक गोविंद दास ब्रह्मचारी आदि शामिल हुए। 

चौखुटिया। जगन्नाथ यात्रा शुरू होने से पहले भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा का श्रृंगार किया गया। फिर शुद्ध देशी घी से बनाए गए 56 भोग में कई व्यंजन परोसे गए। जिसमें लेमन चांवल, नारियल चावल, जीरा चावल, पालक चावल, इसी तरह पनीर के दर्जनभर व्यंजन, फ्रूट चटनी, टमाटर चटनी, मीठी चटनी, खाजा, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पेठा लड्डू, बेसन लड्डू, जलेबी, बालूसाई, आटा लड्डू सहित दो दर्जन मीठे पकवान सहित कई व्यंजनों का भोग लगाया गया।

व्यंजन तैयार करने में पांच लोगों को 16 घंटे का समय लगा। रविवार शाम तीन बजे से रात 12 बजे तक और फिर सुबह पांच बजे से दोपहर 12 बजे तक पकवान तैयार किए। बताया कि 56 भोग के नाम से जितना अधिक हो भोग लगाए जाते हैं।   


चौखुटिया। भगवान जगन्नाथ के रथ पर लगे मोटे रस्से को खींचने के लिए लोगों में होड़ मची रही। यात्रा में शामिल भक्तों के अलावा विभिन्न स्थानों पर स्वागत में खड़े लोग भी मूर्तियों का दर्शन करने के साथ ही किसी तरह रस्से को छू लेने को आतुर दिखे। बताया गया कि यात्रा के दौरान रस्सा खींचने का बड़ा आध्यात्मिक महत्व है।
 

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