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नया ट्रेंड: आलू के गुटकों की जगह पहाड़ियों ने कर ली ढोकले और डोसे से दोस्ती, कारोबारी भी अच्छा मुनाफा कमा रहे

Sat, 12 Jul 2025 02:28 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 12 Jul 2025 02:28 PM IST
सार

आलू के गुटकों और जलेबी के जायके के लिए प्रसिद्ध पहाड़ों में आज गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान के व्यंजन और मिष्ठान चटखारे लेकर खाए जा रहे हैं। अल्मोड़ा जिले में भी ढोकला, डोसा और प्याज कचौड़ी की मांग बढ़ रही है। 

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Instead of potato balls, the hill people have made friends with dhokla and dosa
ढोकला

विस्तार

सड़क, संचार सुविधाओं ने न सिर्फ लोगों के बीच की दूरी को कम किया है बल्कि संस्कृति, वेशभूषा और स्वाद के आदान-प्रदान में भी अहम रोल निभाया है। आलू के गुटकों और जलेबी के जायके के लिए प्रसिद्ध पहाड़ों में आज गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान के व्यंजन और मिष्ठान चटखारे लेकर खाए जा रहे हैं। जिले में भी ढोकला, डोसा और प्याज कचौड़ी की मांग बढ़ रही है। लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए व्यापारी भी इनसे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

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पिछले पांच वर्षों में नगर के खानपान बाजार में बदलाव आया है। अलग-अलग प्रदेशों के प्रसिद्ध व्यंजन और मिष्ठान यहां की दुकानों में मिलने लगे हैं। कुछ ही दुकानों में मिलने वाले इन भोज्य पदार्थों को लेकर लोगों में भी खूब दीवानगी दिख रही है। मांग बढ़ने के बाद व्यापारियों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है। नगर के बाजार में दो साल पहले ढोकला 200 रुपये प्रति प्लेट मिलता था, वर्तमान में 240 रुपये प्लेट मिल रहा है। डोसा खाने के लिए लोग 120 रुपये खर्च कर रहे हैं तो हाल में नगर में लांच हुई प्याज कचौड़ी 60 रुपये प्लेट मिल रही है।

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पहले मिठाई की दुकान थी, फिर रेस्टोरेंट कारोबार भी शुरू किया तो कुछ नया स्वाद लोगों तक पहुंचाने का मन था। ग्राहकों की मांग के अनुसार डोसा, ढोकला बनाना शुरू किया। इन व्यंजनों की अब लोगों में काफी मांग है। लोगों को फिर नया स्वाद परोसने के लिए राजस्थानी प्याज कचौड़ी भी बनाने लगे हैं। -अक्षित जखवाल, कारोबारी

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20 साल पहले आगरा से बागेश्वर आया था तो पहली बार डोसा बनाने की शुरुआत की थी। उस समय इसका चलन कम था। धीरे-धीरे लोगों को डोसे का स्वाद भाने लगा तो फिर ढोकला बनाना शुरू किया। अब लोगों में इन व्यंजनों की काफी मांग को देखते हुए राजस्थानी स्वाद परोस रहे हैं। लोगों को खिलाते-खिलाते अब यहीं मन लग गया है। - अशोक बघेल, शेफ

नगर की दुकानों पर अब खाने-पीने की वस्तुओं में काफी विविधता मिलती है। न सिर्फ स्थानीय बल्कि अलग-अलग राज्यों का भोजन, मिष्ठान उपलब्ध है। चुनिंदा रेस्टाेरेंट में मिलने वाले ढोकला, डोसा हर वर्ग के लोगों की पसंद बन रहा है। जब मन किया परिवार के साथ समीप के रेस्टोरेंट में जाकर इनका लुत्फ उठाया जा सकता है। -अमित डसीला, ग्राहक

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