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Almora News: ठंड में अंडोली, रेखाड़ी, भीलोली में पेयजल के लिए हाहाकार, लोगों के सूखे हलक
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जागेश्वर (अल्मोड़ा)। ठंड में जागेश्वर क्षेत्र के गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। ऐसे में 1150 की आबादी के हलक सूख गए हैं। लोग नौले और जल स्रोतों से पानी ढो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी उन्हें पेयजल के लिए प्राकृतिक जल स्रोत पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जागेश्वर के अंडोली, रेखाड़ी और भीलोली राजस्व गांवों में उत्तराखंड पेयजल योजना के तहत करीब आठ 8 करोड़ रुपये की लागत से गैराड पंपिंग योजना अस्तित्व में आई। 150 केएल क्षमता का सप्लाई टैंक भी तैयार किया गया। तब कुछ गांवों तक पेयजल लाइनें बिछाई गईं लेकिन आज भी कई घरों तक योजना के पहुंचने का इंतजार है। हैरानी की बात है कि विभाग ने ग्रामीणों को जल जीवन मिशन की जानकारी तक नहीं दी है। ऐसे इन गांवों की एक हजार से अधिक की आबादी नौले और धारों से पानी ढा़ेकर किसी तरह अपनी प्यास बुझा रही है।
भोजना माताएं पानी ढ़ोकर पका रही मध्यान्ह भोजन
जीआईसी अंडोली में पेयजल संकट गहराने से मध्यान्ह भोजन बनाने में भोजन माताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाचार्य मनीष कुमार ने बताया कि विद्यालय में कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए भोजन माताएं प्राकृतिक जलस्रोतो से पानी सर पर ढोकर लाने को मजबूर हैं।
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इन्हें है योजना का लाभ मिलने का है इंतजार
ग्राम प्रधान रेखा पांडे, पूर्व प्रधान तारा पांडे, कृष्णानंद पांडे, महेश्वर दत्त, हरीश चंद्र पांडे, नवीन चंद्र, कमलापति पांडे, महेश पांडे, खीमा पांडे सहित कई ग्रामीणों को पेयजल योजना का लाभ मिलने का इंतजार है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें इस योजना से जोड़ा जाए ताकि उन्हें बुनियादी सुविधा के लिए वंचित न रहना पड़े।
वर्जन
- प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर जल्द हर घर तक पानी पहुंचने के लिए इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की मांग को पूरी गंभीरता के साथ लिया जाएगा ताकि उन्हें पेयजल संकट से न जूझना पड़े।
-दीप चंद, एई, जल निगम अल्मोड़ा
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जागेश्वर के अंडोली, रेखाड़ी और भीलोली राजस्व गांवों में उत्तराखंड पेयजल योजना के तहत करीब आठ 8 करोड़ रुपये की लागत से गैराड पंपिंग योजना अस्तित्व में आई। 150 केएल क्षमता का सप्लाई टैंक भी तैयार किया गया। तब कुछ गांवों तक पेयजल लाइनें बिछाई गईं लेकिन आज भी कई घरों तक योजना के पहुंचने का इंतजार है। हैरानी की बात है कि विभाग ने ग्रामीणों को जल जीवन मिशन की जानकारी तक नहीं दी है। ऐसे इन गांवों की एक हजार से अधिक की आबादी नौले और धारों से पानी ढा़ेकर किसी तरह अपनी प्यास बुझा रही है।
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भोजना माताएं पानी ढ़ोकर पका रही मध्यान्ह भोजन
जीआईसी अंडोली में पेयजल संकट गहराने से मध्यान्ह भोजन बनाने में भोजन माताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाचार्य मनीष कुमार ने बताया कि विद्यालय में कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए भोजन माताएं प्राकृतिक जलस्रोतो से पानी सर पर ढोकर लाने को मजबूर हैं।
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इन्हें है योजना का लाभ मिलने का है इंतजार
ग्राम प्रधान रेखा पांडे, पूर्व प्रधान तारा पांडे, कृष्णानंद पांडे, महेश्वर दत्त, हरीश चंद्र पांडे, नवीन चंद्र, कमलापति पांडे, महेश पांडे, खीमा पांडे सहित कई ग्रामीणों को पेयजल योजना का लाभ मिलने का इंतजार है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें इस योजना से जोड़ा जाए ताकि उन्हें बुनियादी सुविधा के लिए वंचित न रहना पड़े।
वर्जन
- प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर जल्द हर घर तक पानी पहुंचने के लिए इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की मांग को पूरी गंभीरता के साथ लिया जाएगा ताकि उन्हें पेयजल संकट से न जूझना पड़े।
-दीप चंद, एई, जल निगम अल्मोड़ा