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अल्मोड़ा: योगिक क्रियाओं से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर, 240 युवाओं पर हुआ शोध

Mon, 21 Sep 2026 03:03 PM IST
गायत्री जोशी अनिल सनवाल
अनिल सनवाल Published by: गायत्री जोशी Updated Mon, 21 Sep 2026 03:03 PM IST
सार

अल्मोड़ा के एसएसजे विश्वविद्यालय में 240 युवाओं पर हुए शोध में सूर्य नमस्कार, मंत्र-जप और प्राणायाम के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन किया गया। शोध में चार मनोवैज्ञानिक आयामों में महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।

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Impact of yogic practices on the mental health of youth: Study conducted on 240 young people
yoga - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सामाजिक-आर्थिक दबावों के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे समय में अल्मोड़ा में मनोविज्ञान के क्षेत्र में हुआ एक शोध योगिक क्रियाओं की मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन में संभावित उपयोगिता को सामने लाता है।

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अध्ययन में सूर्य नमस्कार, मंत्र-जप और प्राणायाम के अभ्यास का युवाओं के अवसाद, तन्यता, मनोवैज्ञानिक स्वस्तिबोध और संवेगात्मक क्षमता पर प्रभाव देखा गया। यह शोध सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा की प्रो. मधुलता नयाल के निर्देशन में डॉ. रजनीश जोशी ने किया।

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अध्ययन में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 240 युवाओं को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को 120-120 के दो समूहों प्रयोगात्मक और नियंत्रित में विभाजित किया गया। सभी प्रतिभागी ऐसे युवा थे, जो इससे पहले नियमित योगाभ्यास नहीं करते थे।

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दो माह तक कराया गया योगिक अभ्यास

शोध में पहले और बाद में प्रयोगात्मक शोध अभिकल्प अपनाया गया। प्रयोगात्मक समूह के प्रतिभागियों को विभिन्न योगिक क्रियाओं का नियमित अभ्यास कराया गया। सूर्य नमस्कार समूह को दो माह तक प्रतिदिन 30 मिनट अभ्यास कराया गया। वहीं मंत्र-जप में ॐ जप और अजपा जप (सोऽहम्) तथा प्राणायाम में नाड़ी शोधन और अनुलोम-विलोम को शामिल किया गया। हस्तक्षेप से पहले और बाद में प्रतिभागियों का मनोवैज्ञानिक मापन किया गया, ताकि योगिक अभ्यास के प्रभावों की तुलना की जा सके।

 

चार प्रमुख मनोवैज्ञानिक आयामों पर अध्ययन

शोध में योगिक क्रियाओं के प्रभाव का अध्ययन अलग-अलग और समग्र रूप से चार प्रमुख आयामों पर किया गया। जिनमें अवसाद, तन्यता, मनोवैज्ञानिक स्वस्तिबोध और संवेगात्मक क्षमता शामिल रहे। अध्ययन के अनुसार सूर्य नमस्कार और मंत्र-जप के बाद प्रयोगात्मक समूह में इन चारों मनोवैज्ञानिक आयामों में सार्थक अंतर पाया गया। इसी प्रकार प्राणायाम के अभ्यास के बाद भी चारों आयामों में महत्वपूर्ण अंतर दर्ज किया गया। समग्र योगिक अभ्यास के प्रभाव को भी शोध में महत्वपूर्ण पाया गया।

 

मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की संभावनाओं को मिला आधार

शोध की खासियत यह है कि इसमें योग को केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि उसे मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, भावनात्मक संतुलन और प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता से जोड़कर देखा गया है। अध्ययन के निष्कर्ष योग के निवारक और सहायक उपचारात्मक उपयोग की संभावनाओं की ओर भी संकेत करते हैं। शोधकर्ता के अनुसार, इसके आधार पर भविष्य में विशेष रूप से युवाओं के लिए योग आधारित मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

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