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स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय के अस्पतालों की दौड़ लगानी मजबूरी
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेराघाट(भैंसियाछाना)।
- फोटो : ALMORA
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। तीन जिलों की सीमा पर स्थित पीएचसी सेराघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जैसी जांचों के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ के अभाव में भी मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि मोटरमार्ग भी बदहाल है।
सीमांत पीएचसी सेराघाट के हवाले अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ तीनों जिलों की हजारों की आबादी है लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। अस्पताल में एंबुलेंस ले जाने के लिए सड़क भी बदहाल है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे समेत कई जांचों का मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता। स्त्री रोग संबंधी इलाज के लिए मरीजों को 70 किमी से अधिक की दौड़ लगानी पड़ती है।
अस्पताल के भवन की हालत जर्जर है। छत टपक रही है, अंदर रखी मशीनें जंग खा रही हैं तो दवाएं खराब हो रही हैं। डॉक्टर के अवकाश में रहने से दिक्कतें होती हैं। फार्मासिस्ट के भरोसे मरीजों को संतोष करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे आदि के लिए 65 किमी दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
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-ग्राम प्रधान पूजा आर्या।
सेराघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं का हमेशा भारी अभाव रहता है। यहां एक डॉक्टर हैं, महिला डॉक्टर का पद वर्षों से रिक्त हैं। अस्पताल की एंबुलेंस सड़ चुकी है। एक एएनएम के भरोसे प्रसव होता है। गर्भवतियों के लिए लैब तकनीशियन और महिला डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए।
-रेखा पांडे, ज्येष्ठ उपप्रमुख।
अस्पताल तक मरीजों को पहुंचाने के लिए सड़क तक बदहाल है। एंबुलेंस के चलने लायक सड़क नहीं है। मरीजों को पीठ पर बिठाकर करीब 800 मीटर बदहाल मार्ग से अस्पताल पहुंचना पड़ता है। मोटरमार्ग के लिए कई बार विभाग को प्रस्ताव भेज दिया गया लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है।
-संतोष कुमार आर्य, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य।
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सीमांत पीएचसी सेराघाट के हवाले अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ तीनों जिलों की हजारों की आबादी है लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। अस्पताल में एंबुलेंस ले जाने के लिए सड़क भी बदहाल है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे समेत कई जांचों का मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता। स्त्री रोग संबंधी इलाज के लिए मरीजों को 70 किमी से अधिक की दौड़ लगानी पड़ती है।
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अस्पताल के भवन की हालत जर्जर है। छत टपक रही है, अंदर रखी मशीनें जंग खा रही हैं तो दवाएं खराब हो रही हैं। डॉक्टर के अवकाश में रहने से दिक्कतें होती हैं। फार्मासिस्ट के भरोसे मरीजों को संतोष करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड, एक्सरे आदि के लिए 65 किमी दूर अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
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-ग्राम प्रधान पूजा आर्या।
सेराघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं का हमेशा भारी अभाव रहता है। यहां एक डॉक्टर हैं, महिला डॉक्टर का पद वर्षों से रिक्त हैं। अस्पताल की एंबुलेंस सड़ चुकी है। एक एएनएम के भरोसे प्रसव होता है। गर्भवतियों के लिए लैब तकनीशियन और महिला डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए।
-रेखा पांडे, ज्येष्ठ उपप्रमुख।
अस्पताल तक मरीजों को पहुंचाने के लिए सड़क तक बदहाल है। एंबुलेंस के चलने लायक सड़क नहीं है। मरीजों को पीठ पर बिठाकर करीब 800 मीटर बदहाल मार्ग से अस्पताल पहुंचना पड़ता है। मोटरमार्ग के लिए कई बार विभाग को प्रस्ताव भेज दिया गया लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है।
-संतोष कुमार आर्य, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य।