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मरीज को भर्ती किया जाता है बेस में लेकिन ब्लड के लिए दौड़ाया जाता है जिला अस्पताल
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अल्मोड़ा। लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है लेकिन लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जाता है लेकिन उनके लिए यहां ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है। मरीजों को ब्लड के लिए ढाई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना होने के बाद बेस अस्पताल को भी इसके अधीन कर दिया गया है। बेस अस्पताल में पूरे जिले के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमेें से कुछ आपातकालीन केस होते हैं जिनमें इलाज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं के इलाज और सर्जरी आदि में भी मरीज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। यहां मरीजों के लिए ब्लड बैंक बना तो है लेकिन वह अभी तक संचालित नहीं हो पाया। मरीजों के परिजनों को जिला अस्पताल से ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती है।
यहां के ब्लड बैंक की क्षमता 350 यूनिट है जिसमें से महिला अस्पताल और बेस अस्पताल के साथ ही निजी अस्पतालों को भी ब्लड की सप्लाई की जाती है। अकेले बेस अस्पताल में ही मरीजों के लिए हर माह 50 से 60 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इसमें भी ए, ओ और बी ग्रुप के ब्लड की डिमांड सबसे अधिक होती है। मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए ब्लड बैंक होना चाहिए जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर ब्लड उपलब्ध हो सके। मेडिकल कॉलेज में अभी मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। कब तक यहां ब्लड बैंक संचालित हो पाएगा यह भी स्पष्ट नहीं है।
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ब्लड के अभाव में बाधित होते हैं ऑपरेशन
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के साथ ही टीवी के मरीजों को भी भर्ती किया जाता है। कई मामले सर्जरी के भी आते हैं। ऐसे मामलों में अधिकतर में मरीज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। ब्लड बैंक न होने से मरीजों को परेशानी होती है। कई बार ब्लड देर में मिलने से मरीज की जान खतरे में भी पड़ जाती है। कई बार जरूरत के अनुसार उसी ग्रुप का ब्लड न मिलने से भी परेशानी खड़ी हो जाती है।
बेस को रखरखाव की जरूरत
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल को भी रखरखाव की जरूरत है। यहां मेडिशन वार्ड की छत टूटी है। कई स्थानों पर मरीजों के बैठने वाली कुर्सियां भी खराब हैं। कई बार यहां मरीजों को डॉक्टर भी समय पर उपलब्ध नहीं होते जिससे दूरदराज से आने वाले मरीजों का समय और पैसा दोनों खराब होता है। मरीजों को ले जाने के लिए यहां रैंप की व्यवस्था भी नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक स्थापित किया गया है लेकिन इसे संचालित करने के लिए अस्पताल में डाक्टर नहीं है। मरीजों की जरूरत के अनुसार जिला अस्पताल से मरीजों के लिए ब्लड की व्यवस्था की जाती है। जल्द ही यहां ब्लड बैंक संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा।
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जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना होने के बाद बेस अस्पताल को भी इसके अधीन कर दिया गया है। बेस अस्पताल में पूरे जिले के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमेें से कुछ आपातकालीन केस होते हैं जिनमें इलाज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं के इलाज और सर्जरी आदि में भी मरीज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। यहां मरीजों के लिए ब्लड बैंक बना तो है लेकिन वह अभी तक संचालित नहीं हो पाया। मरीजों के परिजनों को जिला अस्पताल से ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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यहां के ब्लड बैंक की क्षमता 350 यूनिट है जिसमें से महिला अस्पताल और बेस अस्पताल के साथ ही निजी अस्पतालों को भी ब्लड की सप्लाई की जाती है। अकेले बेस अस्पताल में ही मरीजों के लिए हर माह 50 से 60 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। इसमें भी ए, ओ और बी ग्रुप के ब्लड की डिमांड सबसे अधिक होती है। मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए ब्लड बैंक होना चाहिए जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर ब्लड उपलब्ध हो सके। मेडिकल कॉलेज में अभी मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। कब तक यहां ब्लड बैंक संचालित हो पाएगा यह भी स्पष्ट नहीं है।
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ब्लड के अभाव में बाधित होते हैं ऑपरेशन
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के साथ ही टीवी के मरीजों को भी भर्ती किया जाता है। कई मामले सर्जरी के भी आते हैं। ऐसे मामलों में अधिकतर में मरीज के लिए ब्लड की जरूरत पड़ती है। ब्लड बैंक न होने से मरीजों को परेशानी होती है। कई बार ब्लड देर में मिलने से मरीज की जान खतरे में भी पड़ जाती है। कई बार जरूरत के अनुसार उसी ग्रुप का ब्लड न मिलने से भी परेशानी खड़ी हो जाती है।
बेस को रखरखाव की जरूरत
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल को भी रखरखाव की जरूरत है। यहां मेडिशन वार्ड की छत टूटी है। कई स्थानों पर मरीजों के बैठने वाली कुर्सियां भी खराब हैं। कई बार यहां मरीजों को डॉक्टर भी समय पर उपलब्ध नहीं होते जिससे दूरदराज से आने वाले मरीजों का समय और पैसा दोनों खराब होता है। मरीजों को ले जाने के लिए यहां रैंप की व्यवस्था भी नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक स्थापित किया गया है लेकिन इसे संचालित करने के लिए अस्पताल में डाक्टर नहीं है। मरीजों की जरूरत के अनुसार जिला अस्पताल से मरीजों के लिए ब्लड की व्यवस्था की जाती है। जल्द ही यहां ब्लड बैंक संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा।