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दिव्यांग बेटी में संगीत खोजकर मां ने दिया नया जीवन
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 29 Jun 2016 11:01 PM IST
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मां के साथ बेंजी।
- फोटो : अमर उजाला
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मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग बेंजी को पैदाइशी ऐसी बीमारी थी कि डाक्टरों ने उन्हें लाइलाज घोषित कर दिया। मां उसे इलाज के लिए अमेरिका ले गई, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी। ऑटिज्म नाम से पहचानी जाने वाली इस बीमारी के कारण बेंजी की आंख की पुतली तक नहीं हिलती थी, लेकिन बेंजी की मां ने हिम्मत नहीं हारी।
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जब बेंजी चार साल की थी तो एक दिन मां ने देखा कि म्यूजिक सिस्टम में गीत बजने पर उसकी आंख की पुतली में कुछ हलचल हुई। फिर मां ने बेंजी को सिंगर बनाने की ठान ली। मां ने संगीत के सहारे जहां बेंजी को काफी हद तक स्वस्थ बना दिया वहीं वह राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार पाने के साथ, दो बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करवा चुकी हैं।
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नई दिल्ली के ईस्ट कैलाश में रहने वाली श्रीमती कविता कुमार की बेटी बेंजी जन्म से ही ऑटिज्म बीमारी से पीड़ित थी। पैदा होने के कई माह बाद तक जब बेंजी हिलती डुलती नहीं थी तो कविता कुमार को उसके किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने का अहसास हुआ। वह बेंजी को देश के सभी जाने माने अस्पतालों में ले गई पर कुछ फायदा नहीं हुआ। इसके बाद मां बेंजी को अमेरिका तक ले गई, लेकिन डाक्टरों का कहना था कि बेंजी पूरी जिंदगी बेड पर अथवा ह्वील चेयर पर ही रह सकेगी।
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उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन और बास्केटबाल की खिलाड़ी रह चुकी बेंजी की मां कविता कुमार ने हिम्मत नहीं हारी। एमएड की शिक्षा प्राप्त कर चुकी मां ने बेटी की खुद ही निगरानी करनी शुरू की। कविता कुमार बताती हैं कि उन्होंने बेंजी की दैनिक दिनचर्या में संगीत को भी शामिल किया।
जब बेंजी चार साल की थी तो मां ने देखा कि म्यूजिक सिस्टम में गीत बजने पर बेंजिन की आंख की पुतली में कुछ हलचल हुई। इसके बाद उन्होंने बेटी को संगीत सिखाना शुरू किया और उसे सिंगर बनाने की ठान ली। उन्होंने बेंजी को विस्मिल्लाह खान घराने के पंडित रामजी मिश्रा से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दिलाई। संगीत ने असरदार दवा की तरह काम किया और शारीरिक-मानसिक रूप से दिव्यांग हो चुकी बेंजी ने सात साल की उम्र में पहली बार स्टेज शो प्रस्तुत किया।
वैसे तो बेंजी की आयु 22 वर्ष है, लेकिन उसका मानसिक विकास 10 साल के बच्चे के बराबर है। उसने शास्त्रीय संगीत (वोकल) में एमए कर लिया है। वर्तमान में बेंजी को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी आठ म्यूजिक सीडी रिलीज हो चुकी हैं। अलग-अलग कार्यक्रमों में लता मंगेशकर, शोभा मुदगल, ऋतिक रोशन और शाहरुख खान ने बेंजी की सीडी लांच की। बेंजी आज भी बहुत साफ नहीं बोल पाती, लेकिन संगीत में वह सामान्य बच्चों को भी पछाड़ देती हैं। ताज महोत्सव, झांसी महोत्सवों के अलावा देश के कई बड़े शहरों में बेंजी के स्टेज शो हो चुके हैं। वह सिंथेसाइजर भी बजाती हैं। मां कविता का सपना है कि एक दिन बेंजी बालीवुड में पहुंचकर अपना नाम रोशन करे। दर्पण संस्था की संचालिका विभूकृष्णा के प्रयासों से बेंजी ने अल्मोड़ा में भी बच्चों के बीच एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।