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दो दशक बाद भी राज्य आंदोलनकारियों की सुध नहीं ली सरकारों ने: रावत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2020 05:38 PM IST
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Governments did not take care of state agitators: Rawat
रानीखेत (अल्मोड़ा)। राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र रावत ने कहा है कि राज्य बने 20 साल हो गए हैं, लेकिन राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। 2003 में राज्य आंदोलनकारी परिषद का गठन हुआ था। इस दौरान राज्य आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तर्ज पर राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा दिया गया था, लेकिन सुविधाएं आज भी गौण हैं।
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केंद्रीय अध्यक्ष सभी राज्य आंदोलनकारियों को एक मंच पर एकत्रित करने के लिए रानीखेत पहुंचे। यहां विधि आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश तिवारी सहित तमाम आंदोलनकारियों से उन्होंने मुलाकात की। कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, आश्रित पेंशन पर कोई कार्य नहीं किया। राज्य आंदोलनकारियों के हितों के लिए कोई भी नीति नहीं बनाई।
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अब सभी आंदोलनकारियों को एकजुट कर वृहद लड़ाई लड़ी जाएगी। कहा कि राज्य स्थापना दिवस नौ नवंबर तक 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण बहाल नहीं किया गया तो नई रणनीति बनाई जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री गद्दी छोड़ो का नारा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को राज्य आंदोलनकारियों के आश्रित और शहीदों के आश्रितों को आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी देनी चाहिए।
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इस दौरान उनके साथ राज्य आंदोलनकारी विरेंद्र बजेठा, मनोज अधिकारी आदि भी थे। केंद्रीय अध्यक्ष ने अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष पद पर राज्य आंदोलनकारी दिनेश बनौला की ताजपोशी भी की।
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