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जीएनएम का फर्जी डिप्लोमा दिलाया छात्रा को चार लाख लौटाए संस्थान

Thu, 11 Jan 2018 09:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Thu, 11 Jan 2018 09:50 PM IST
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GNM's fake diploma conferred four lakh rupees to the student
अदालत का फैसला - फोटो : demo pic

जिला उपभोक्ता फोरम ने एकेडमिक एजुकेशन कंसलटेंसी आईपीएमटी, कुसुमखेड़ा चौराहा, हल्द्वानी के प्रोपराइटर और अन्य पदाधिकारियों को एक छात्रा से शुल्क के तौर पर जमा कराई गई 3.73 लाख रुपये और हर्जाने के रूप में 35 हजार रुपये एक माह के भीतर छात्रा को लौटाने का आदेश दिया है। 

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 खत्याड़ी निवासी विनीता कनवाल ने जिला उपभोक्ता फोरम में दायर वाद में कहा था कि उसने 2013 में आईपीएमटी एकेडमिक एजुकेशन के अंतर्गत आईपीएमटी कालेज की पवार मार्केट बाड़ी बगीचा, अल्मोड़ा स्थित शाखा में साढ़े तीन साल के जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। उस वक्त उससे हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के मूल प्रमाणपत्र भी जमा करवा लिए गए। उसने पाठ्यक्रम के लिए 3.73 लाख रुपये जमा कराए।
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संस्था के कर्ताधर्ताओं ने इसे बहुत प्रतिष्ठित संस्थान बताते हुए नौकरी दिलाने का भी आश्वासन दिया था। बाद में दूसरे विद्यार्थियों के साथ ही विनीता कनवाल को डिप्लोमा की अंतिम परीक्षा के लिए नवंबर 2016 में इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस बबलियान गंगयाल जम्मू भेजा गया। परीक्षा परिणाम पंजाब नर्स रजिस्ट्रेशन काउंसिल चंडीगढ़ से दिलाया गया। यह डिप्लोमा मान्यता प्राप्त नहीं था और उसके साथ धोखाधड़ी की गई। विनीता ने बताया है कि इस मामले में पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 
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विनीता ने इस मामले में एकेडमिक एजुकेशन कंसलटेंसी आईपीएमटी कुसुमखेड़ा चौराहा हल्द्वानी के प्रोपराइटर भूपेंद्र आर्या, उनकी पत्नी और संस्था की चेयरमैन शिखा और डायरेक्टर हर्षित गोयल, प्रवक्ता नेहा जोशी, पूर्णिमा अंसारी, रजिस्ट्रार पंजाब नर्स रजिस्ट्रेशन काउंसिल और एएमसी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस बबलियाना जम्मू के खिलाफ वाद दायर करके हर्जाना दिलाने की मांग की थी।


 मामले में पूरी सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता फोरम ने भूपेंद्र आर्या, शिखा और हर्षित गोयल को आदेश दिया है कि वह छात्र को एक माह के भीतर चार लाख आठ हजार नौ सौ रुपये का भुगतान करने के साथ ही हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र भी लौटाना सुनिश्चित करें। अंकपत्र और प्रमाणपत्र नहीं लौटाने पर 25 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा। भुगतान एक माह के भीतर नहीं होने पर आठ प्रतिशत ब्याज का भी भुगतान करना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा, सदस्य प्रभात कुमार चौधरी और लीला जोशी के हस्ताक्षरों से जारी किया गया है।

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