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वन भूमि के कारण्ा चौड़ी नहीं हो सकी सड़क
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 12 Nov 2015 11:09 PM IST
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संकरे अल्मोड़ा-घाट मार्ग का चौड़करण आखिर कब होगा। सरकार ने इस सड़क को डबल लेन बनाने को छह साल पहले 2009 में 46.42 करोड़ रुपये मंजूर किए।
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सरकारी विभागों की लेटलतीफ प्रक्रिया के चलते अब तक चौड़ीकरण को वनभूमि ही स्वीकृति ही नहीं मिल सकी है। जबकि वनभूमि की पत्रावली का 100 दिनों में निस्तारण करने का शासनादेश है।
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अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मोटर मार्ग सामरिक और आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी इसी मार्ग से होकर निकलती है। सड़क संकरा होने से दुर्घटनाओं की संभावनाएं रहती हैं।
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दोनों जिलों की जनता सुरक्षित यातायात के लिए सड़क के चौड़ीकरण की मांग करती आ रही है। 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने पिथौरागढ़ आकर इस सड़क के सुधारीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत करने की घोषणा की थी।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शासन ने अल्मोड़ा से घाट तक करीब 82 किमी लंबी सड़क को चौड़ा करने, पुलों का जीर्णोद्धार, कल्वर्ट और पैराफिटों के निर्माण के लिए 46.42 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की थी।
लोनिवि की योजना इस मार्ग को डबल लेन बनाने की है। चौड़ीकरण के बाद सड़क की चौड़ाई 30 फीट तक की जानी है। बजट मंजूर होने के छह साल बाद भी सुधारीकरण का काम शुरू नहीं हो पाना सरकारी विभागों की सुस्त गति और लचर कार्य प्रणाली का प्रतीक है।
लोनिवि निर्माण खंड ने वनभूमि की पत्रावली तैयार कर कई बार केंद्र सरकार के नोडल कार्यालय को भेजी है। इस कार्यालय से हर बार किसी न किसी आपत्ति के बहाने पत्रावली वापस भेज दी जाती है।
वर्तमान में एक बार यह फाइल नोडल कार्यालय में धूल फांक रही है। छह साल के लंबे समय में निर्माण कार्य की दरों में ही काफी बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में यदि वनभूमि की मंजूरी मिल भी जाती है तो फिर सुधारीकरण में बजट की कमी आड़े आने की आशंका है।
लोनिवि निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता किशन नाथ गोस्वामी ने बताया कि वनभूमि की स्वीकृति नहीं मिल पाने से चौड़ीकरण का काम शुरूनहीं हो सका है। पत्रावली नोडल कार्यालय को भेजी गई है।
उन्होंने बताया कि यह मार्ग अब नेशनल हाई-वे के अधीन हस्तांतरित हो गया है। चौड़ीकरण का काम लोनिवि एनएच खंड द्वारा कराया जाएगा।